बेमेतरा (सुघर गांव)। 28 अगस्त 2026,
गुरु अमरदास बाबा जी की समाधी तपोभूमि स्थल शिवनाथ नदी तट पर छेरछेरा पुन्नी को प्रति वर्ष त्रिदिवसीय विशाल संत समागम गुरू दर्शन मेले में पहुंचने वाले प्रदेश भर से संत श्रद्धालुओं दर्शनार्थियों पर्यटकों और आस पास गांव के ग्रामीणों की परेशानी इस बार भी कम होती नजर नहीं आ रही है। बरसात के दिनों में आवागमन की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। चेटुवा और किरतपुर के बीच शिवनाथ नदी पर निर्माणाधीन उच्च स्तरीय पुल लंबे समय से अधूरा पड़ा है, जिसके कारण हजारों ग्रामीण आज भी सुगम आवागमन की राह देख रहे हैं।
अप्रैल 2022 में शुरू हुआ था निर्माण
जानकारी के अनुसार चेटुवा-किरतपुर उच्च स्तरीय पुल निर्माण परियोजना की शुरुआत अप्रैल 2022 में हुई थी। इसे वर्ष 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अगस्त 2026 तक भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 22.88 करोड़ रुपये बताई गई है। ग्रामीणों के मुताबिक भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित गति नहीं मिलने के कारण परियोजना में लगातार देरी हो रही है।
877.50 मीटर लंबे पुल से घटेगी 20 किमी की दूरी
शिवनाथ नदी पर बनने वाले इस पुल की कुल लंबाई 877.50 मीटर है। पुल के निर्माण से किरतपुर से रायपुर की ओर आने - जाने वाले लोगों को करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इससे क्षेत्र के लगभग 150 गांवों के लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। पुल के पूरा होने से आवागमन आसान होने के साथ - साथ क्षेत्र के व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण संपर्क को भी मजबूती मिलेगी।
बरसात में डूब जाता है एनीकट, टूट जाता है संपर्क
चेटुवा-किरतपुर के शिवनाथ घाट में पहले से एनीकट बना हुआ है, लेकिन बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ आने पर एनीकट डूब जाता है। ऐसी स्थिति में कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट जाता है। यही वजह है कि ग्रामीण लंबे समय से उच्च स्तरीय पुल के जल्द निर्माण की मांग कर रहे हैं।
निर्माण स्थल पर नहीं दिख रहा शासन का बैनर
निर्माण स्थल पर छत्तीसगढ़ शासन से संबंधित लगाया गया बैनर भी वर्तमान में नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बैनर असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ा गया है या लंबे समय से रखरखाव के अभाव में हट गया है। मौके पर फिलहाल पुल का लोहे का ढांचा ही प्रमुख रूप से दिखाई देता है, जिससे निर्माण की धीमी गति साफ नजर आती है।
अब सवाल - आखिर कब पूरा होगा पुल?
चार साल से अधिक समय बीतने के बाद भी महत्वपूर्ण पुल परियोजना का अधूरा रहना क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हर बरसात में एनीकट डूबने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चेटुवा-किरतपुर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण आखिर कब पूरा होगा और 150 गांवों के लोगों को सुगम आवागमन की सुविधा कब मिल सकेगी? ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई और निर्माण कार्य की रफ्तार पर टिकी हुई है।
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