विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ
कोरबा (सुघर गांव) बुका हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय सहित प्रदेश के विभिन्न जलाशयों से जुड़े विस्थापित आदिवासी, पारंपरिक मछुआरा समुदाय और मत्स्य समितियां आज बुका में राज्य स्तरीय महासम्मेलन में एकजुट होंगी। सम्मेलन में जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय अधिकार, मत्स्य नीति में बदलाव और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग प्रमुख रूप से उठेगी। नेताओं के संदेश
दीपक बैज अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी “जलाशयों पर पहला अधिकार स्थानीय विस्थापितों और मछुआरा समुदायों का है। सरकार को बाहरी ठेकेदारों को बढ़ावा देने वाली नीति तुरंत वापस लेनी चाहिए।”
डॉ. चरण दास महंत नेता प्रतिपक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा “ग्राम सभा की अनुमति के बिना जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों का ठेका देना संविधान और पेसा कानून का सीधा उल्लंघन है।”
टी. एस. सिंहदेव पूर्व उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन “यह संघर्ष केवल मछली पालन का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, परंपरा और अधिकारों की रक्षा का आंदोलन है।”
ज्योत्सना चरण दास महंत सांसद, कोरबा लोकसभा क्षेत्र “स्थानीय समुदायों को जल संसाधनों से जोड़ना ही क्षेत्र के विकास और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा का रास्ता है।”
प्रमुख मांगें मत्स्य नीति में तत्काल संशोधन, जलाशयों की ठेका प्रथा समाप्त, स्थानीय मछुआरा समितियों को प्राथमिक अधिकार, ग्राम सभा की सहमति के बिना ठेका बंद, जलाशयों पर सामुदायिक अधिकार पत्र लागू करने की मांग
कार्यक्रम का आयोजन विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति द्वारा किया जा रहा है।
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