हरदीबाजार में उग्र हुआ विरोध, 27 मार्च की डीआरआरसी बैठक का बहिष्कार तय

हरदीबाजार में उग्र हुआ विरोध,27 मार्च की डीआरआरसी बैठक का बहिष्कार तय
 पुराने अधिग्रहण के लंबित मुआवजे,नौकरी व बसाहट के बिना नए सर्वे का विरोध तेज
      विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
 कोरबा (सुघर गांव)। 22 मार्च 2026, जिले के पाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत हरदीबाजार में रविवार दोपहर पंचायत भवन में सरपंच की अगुवाई में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में 2004 व 2010 के अधिग्रहण से जुड़े लंबित मामलों को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और 27 मार्च को कलेक्ट्रेट में प्रस्तावित डीआरआरसी बैठक का विरोध करने का निर्णय लिया।       
 मुख्य घटनाक्रम - बैठक का आयोजन और उद्देश्य 
पंचायत भवन हरदीबाजार में दोपहर 3 बजे बैठक रखी गई,जिसका मुख्य उद्देश्य 2025 के प्रस्तावित अधिग्रहण सर्वे से पहले पुराने मामलों का समाधान सुनिश्चित करना रहा।
    लंबित मुआवजा और सुविधाओं पर नाराजगी
ग्रामीणों ने बताया कि 2004-2010 अधिग्रहण की सर्वे नापी लगभग पूर्ण होने के बावजूद अब तक मौजा राशि, नौकरी,बसाहट व परिसंपत्तियों की सूची नहीं दी गई।
        जनप्रतिनिधियों के संक्षिप्त वक्तव्य 
सरपंच लोकेश्वर कंवर ने कहा कि- पहले पुराने अधिग्रहण का पूरा लाभ दिया जाए,तभी नई प्रक्रिया स्वीकार होगी। पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि - वर्षों से लंबित मामलों को नजरअंदाज करना अन्याय है। पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन ने कहा - बिना मुआवजा दिए नया सर्वे शुरू करना उचित नहीं। नरेश टंडन ने कहा- ग्रामीणों के अधिकारों के साथ समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रमेश अहीर ने कहा - पहले रोजगार और बसाहट सुनिश्चित हो, फिर आगे की कार्रवाई हो।
      डीआरआरसी बैठक का विरोध का निर्णय
ग्रामवासियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पुराने अधिग्रहण का पूर्ण समाधान नहीं होगा, तब तक 2025 की डीआरआरसी बैठक में शामिल नहीं होंगे और विरोध करेंगे।
           प्रशासन और प्रबंधन पर सवाल
 ग्रामीणों ने एसईसीएल दीपका प्रबंधन व जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि समय पर मुआवजा पत्रक जारी नहीं किया गया,जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा है।
      बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता
 बैठक में विजय जायसवाल,रामशरण कंवर,गोपाल यादव, अरुण राठौर,राजेश जायसवाल,दिनेश गुरुद्वान,प्रेम डिक्सेना,अशोक डिक्सेना सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
                          निष्कर्ष
हरदीबाजार के ग्रामीण अब अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह मुखर हो चुके हैं। जब तक पुराने अधिग्रहण के मामलों का समाधान नहीं होता,तब तक नए अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।

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