कोरबा में प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती,रेत माफिया मनरेगा भ्रष्टाचार और फ्लाई ऐश ने बढ़ाई नव कलेक्टर की मुश्किलें
विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 20 दिसंबर 2025, जिले में नवपदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पदभार ग्रहण कर लिया है। उनके आगमन के साथ ही जिले में प्रशासनिक सख्ती की उम्मीदें जरूर जगी हैं,लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। अवैध रेत खनन, मनरेगा में वर्षों से जमे कर्मियों का भ्रष्ट तंत्र और फ्लाई ऐश का अनियंत्रित प्रबंधन — ये तीनों मुद्दे फिलहाल जिले की सबसे गंभीर समस्याएं बने हुए हैं।
नदियों पर हमला अवैध रेत खनन बेलगाम
कोरबा जिले की नदियों और नालों से खुलेआम रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। भारी मशीनों और ट्रैक्टरों के जरिए दिन-रात रेत निकाली जा रही है। रॉयल्टी की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर भंडारण और कालाबाजारी की जा रही है, जिससे जलस्तर गिर रहा है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
मनरेगा में ‘स्थायी’ भ्रष्ट तंत्र
मनरेगा योजना में जिला और ब्लॉक स्तर पर कई अधिकारी-कर्मी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। आरोप है कि फर्जी हितग्राही, कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान और गलत जियो-टैगिंग के जरिए लाखों रुपये का दुरुपयोग किया गया। कार्रवाई अधिकतर निचले स्तर तक सीमित रहने से व्यवस्था पर कोई ठोस असर नहीं पड़ा है।
फ्लाई ऐश से जन स्वास्थ्य पर खतरा
औद्योगिक जिले में फ्लाई ऐश का परिवहन और डंपिंग गंभीर चिंता का विषय बन गया है। सड़कों, रिहायशी इलाकों और जल स्रोतों के पास फ्लाई ऐश डंप किए जाने से लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है। फ्लाई ऐश से तालाब और जलाशय पाटे जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
पुरानी समस्याएं भी बरकरार
इनके अलावा सड़क, बिजली, पेयजल, अतिक्रमण, भू-विस्थापितों का पुनर्वास और रोजगार जैसी समस्याएं भी वर्षों से लंबित हैं।
अब सबकी नजरें कलेक्टर पर
अब यह देखना अहम होगा कि नव कलेक्टर इन जटिल और गहराई तक फैली समस्याओं पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करते हैं और क्या कोरबा जिले को अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार से राहत मिल पाती है या नहीं।
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