शव दफनाने को लेकर विवाद,गांव में 04 घंटे तक थमी अंतिम विदाई,भूमि स्वामित्व के विवाद में आमने-सामने आए 02 पक्ष,पुलिस हस्तक्षेप से टूटा गतिरोध
विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 20 दिसंबर 2025,
जिले के बांगो थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कछार में एक वृद्ध के शव को दफनाने को लेकर उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब अंतिम संस्कार के दौरान भूमि स्वामित्व को लेकर 02 ग्रामीण पक्ष आमने-सामने आ गए। हालात इतने तनाव पूर्ण हो गए कि करीब चार घंटे तक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रुकी रही, जिससे गांव में भय और तनाव का माहौल बन गया।
शासकीय भूमि पर दफन की तैयारी तभी पहुंचा विरोधी पक्ष
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम कछार निवासी भोंदल यादव (उम्र लगभग 60 वर्ष) का निधन हो गया था। उनके दामाद देवनारायण यादव एवं परिजन शव लेकर गांव के बाहर स्थित एक भूमि पर पहुंचे, जिसे वे शासकीय भूमि बता रहे थे। दफनाने के लिए गड्ढा भी खोद लिया गया था। इसी दौरान ग्राम का ही निवासी धानी प्रसाद धनवार अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और उक्त भूमि को अपनी निजी जमीन बताते हुए शव दफनाने पर आपत्ति जता दी।
तीखी नोकझोंक,बढ़ता तनाव अंतिम संस्कार रोका गया
आपत्ति के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और बहस शुरू हो गई, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि अंतिम संस्कार रोकना पड़ा। मृतक के परिजन असहाय स्थिति में मौके पर ही बैठे रहे और गांव में तनाव व्याप्त हो गया।
पुलिस ने संभाली स्थिति बनी आपसी सहमति
विवाद की सूचना मिलते ही डायल 112 और बांगो थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी और हालात को नियंत्रित किया। काफी मशक्कत और आपसी सहमति के बाद ही पुलिस की मौजूदगी में मृतक भोंदल यादव का अंतिम संस्कार संपन्न कराया जा सका।
पट्टे का दावा सीमांकन की सलाह
बताया जा रहा है कि जिस भूमि को लेकर विवाद हुआ, वह राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि बताई जा रही है, जबकि धनी प्रसाद धनवार ने उस पर अपने नाम से पट्टा होने का दावा किया है। पुलिस ने भविष्य में इस तरह के विवाद से बचने के लिए भूमि सीमांकन और राजस्व जांच कराने की सलाह दोनों पक्षों को दी है।
स्थिति सामान्य,लेकिन उजागर हुई जमीनी विवाद की सच्चाई
घटना के बाद गांव में स्थिति फिलहाल सामान्य बनी हुई है, लेकिन यह मामला एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद की गंभीरता और संवेदनशीलता को उजागर करता है, जहां अंतिम संस्कार जैसे पवित्र कार्य भी विवाद की भेंट चढ़ जाते हैं।
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