प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ
जांजगीर–चांपा ( सुघर गांव )। जिले के इस पहरिया धान खरीदी केंद्र में धान नहीं तौला जा रहा,किसानों का हक तौला जा रहा है — और हर बार किसानों से इसी तरह धान खरीदी किया जाता है,आपको बता दे,कि शासन - प्रशासन के नियमानुसार 40 किलो 680 ग्राम धान + बोरे का वजन लेकिन हकीकत ये है कि यहाँ हर बोरे में 900 ग्राम से 1 किलो 110 ग्राम तक की खुली कटौती। कैमरे पर 3 –4 बोरों की तौल हुई लेकिन एक भी बोरा नियम के मुताबिक नहीं निकला। ये गलती नहीं,ये सिस्टमेटिक लूट है। सवाल सुरक्षा का भी है,₹2.40 प्रति क्विंटल सुरक्षा राशि मिलती है,लेकिन केंद्र में न गार्ड दिखा,न हमाल न ठीक से व्यवस्था,और जब पूछा गया — धान खरीदी प्रभारी जवाब देने में असहज नजर आए। लेकिन उनके सहयोगी गुस्से से आगबबूला हो गए,और पत्रकारों के ओर उंगली उठाकर कहने लगे क्या मंडी प्रभारी अपना घर,खेत बेच कर पूर्ति करे। इस तरह के जवाब दिया गया,और बोले यहाँ कोई किसानों को लूटने का काम नही किया जा रहा।चट्टा नियमों की धज्जियाँ दिखावे की भूसी किनारों पर,अंदर नियमों की कब्र। जहां दो लेयर जरूरी, वहां सिर्फ एक — यानि कागज में सब ठीक,जमीन पर सब फेल।
यहां किसान, किसान नहीं — मजदूर है, धान पलटना,बोरा सिलाई,तौल —सब किसान से कराया जा रहा है।एक किसान बताता है —“मजदूर साथ लाना पड़ा,मजदूरी भी खुद देनी पड़ी तभी तौल हो पाई। आपको बता दे,कि और सबसे बड़ा सवाल — निरीक्षण पर धान खरीदी प्रभारी का दावा है,कि जनपद सीईओ बलौदा निरीक्षण पर आए थे,लेकिन उन्हें कोई गड़बड़ी नजर नहीं आई। तो सवाल साफ है - निरीक्षण था या दिखावा आंखें बंद थीं या सच्चाई छुपाई गई
जब प्रभारी जयप्रकाश सिंह से जवाब मांगा गया,तो सिर्फ “सूखती के नाम पर 900 ग्राम से 1 किलो 110 ग्राम तक – कहकर बाकी सवालों से किनारा कर लिया गया। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो मान लीजिए — किसानों की इस लूट में सिस्टम खुद कटघरे में खड़ा है।
कैमरा बोलेगा,
सवाल जिंदा रहेंगे।
"क्या भोले - भाले किसानों को मिल पाएगा न्याय,या होता रहेगा इस तरह से किसानो का शोषण ?
"क्या शासन - प्रशासन के नियमों के विरुद्ध धान खरीदी करना गलत नही है,क्या होगा उनपर उचित कार्यवाही ?
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