नियम किताबों में, लूट तराजू पर, जनपद सीईओ के निरीक्षण में भी दबा सच” कैमरे के सामने जो दिख रहा है,वो किसी आरोप की कहानी नहीं,ये पहरिया धान खरीदी केंद्र की कड़वी हकीकत है

नियम किताबों में, लूट तराजू पर, जनपद सीईओ के निरीक्षण में भी दबा सच” कैमरे के सामने जो दिख रहा है,वो किसी आरोप की कहानी नहीं,ये पहरिया धान खरीदी केंद्र की कड़वी हकीकत है
        अमन कुमार सोनी 
जांजगीर - चांपा (सुघर गांव)। 20 दिसंबर 2025,
जिले के पहरिया धान खरीदी केंद्र मेंधान नहीं तौला जा रहा,किसानों का हक तौला जा रहा है और हर बार अधिक नियम कहते हैं 40 किलो धान + बोरे का वजन लेकिन हकीकत ये है कि हर बोरे में 500 ग्राम से 1 किलो तक की खुली कटौती। कैमरे पर 7 - 8 बोरों की तौल हुई एक भी बोरा नियम के मुताबिक नहीं निकला। ये गलती नहीं,ये सिस्टमेटिक लूट है।
      सवाल सुरक्षा का भी है
₹2.40 प्रति क्विंटल सुरक्षा राशि मिलती है,
लेकिन केंद्र में न गार्ड दिखा,न व्यवस्था।और जब पूछा गया - धान खरीदी प्रभारी जवाब देने में असहज नजर आए।चट्टा नियमों की धज्जियाँ दिखावे की भूसी किनारों पर,अंदर नियमों की कब्र। जहां दो लेयर जरूरी,वहां सिर्फ एक — यानि कागज में सब ठीक,ज़मीन पर सब फेल। यहां किसान, किसान नहीं — मजदूर है,धान पलटना,बोरा सिलाई,तौल —सब किसान से कराया जा रहा है। एक किसान बताता है —“मजदूर साथ लाना पड़ा,मजदूरी भी खुद देनी पड़ी,तभी तौल हो पाई।”और सबसे बड़ा सवाल — निरीक्षण परधान खरीदी प्रभारी का दावा है कि जनपद सीईओ बलौदा निरीक्षण पर आए थे,लेकिन उन्हें कोई गड़बड़ी नजर नहीं आई। तो सवाल साफ है —  निरीक्षण था या दिखावा?
         आंखें बंद थीं या सच्चाई छुपाई गई
जब प्रभारी जयप्रकाश सिंह से जवाब मांगा गया,
तो सिर्फ “सूखती के नाम पर 500–700 ग्राम” कहकर
बाकी सवालों से किनारा कर लिया गया।
 अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो मान लीजिए —किसानों की इस लूट में सिस्टम खुद कटघरे में खड़ा है।
कैमरा बोलेगा,सवाल जिंदा रहेंगे।

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