1 करोड़ के इनामी नक्सली हिड़मा का हुआ एनकाउंटर, माओवादी संगठन के लिए निर्णायक झटका.
जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो छत्तीसगढ़
रायपुर/एजेंसी (सुघर गांव)। पिछले दो दशकों में कई हमलों का मास्टरमाइंड शीर्ष नक्सली कमांडर मादवी हिडमा का एनकाउंटर हुआ। पिछले दो दशकों में कई हमलों का मास्टरमाइंड शीर्ष नक्सली कमांडर मादवी हिडमा का 18 नवंबर 2025 को एनकाउंटर हुआ। जिसमें उसकी मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में मुठभेड़ के दौरान उसकी मौत हुई। कई मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों द्वारा नक्सली कमांडर हिड़मा का एनकाउंट किया।हिड़मा जिसे संतोष नाम से जाना जाता था PLGA की बटालियन नंबर 1 का प्रमुख माना जाता था। इसके साथ ही हिड़मा की पत्नी राजे उर्फ राजक्का के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है।
भारत के सबसे बड़े माओवादी कमांडरों में से एक हिडमा की हत्या माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है। मई में नम्बाला केशव राव उर्फ बसवराज की हत्या और अक्टूबर में मल्लोजुला वेणुगोपाल राव (उर्फ भूपति) के आत्मसमर्पण के कुछ ही समय बाद हुआ है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस सफलता को उग्रवाद के ताबूत में आखिरी कील बताया है।
बता दें इससे पहले भी 2 नवंबर 2025 को बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने सरेंडर भी किया है। जिसकी संख्या लगभग 200 था। इससे भी पहले अक्टूबर 2025 में नक्सल संगठन के शीर्ष विचारक सोनू उर्फ मल्लोजुल्ला वेणुगोपाल उर्फ भूपति ने गढ़चिरौली पुलिस के समक्ष सरेंडर (आत्मसमर्पण) किया था। वेणुगोपाल समेत 60 माओवादियों ने भी सरेंडर किया था।
महेंद्र कर्मा सहित दिग्गज कांग्रेसी की हत्या–
2013 का झीरम घाटी हमला, जिसे छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे दर्दनाक राजनीतिक हत्या कहा जाता है, ने हिड़मा के कद को और बढ़ा दिया। खून से सनी उस दोपहर में महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल सहित कांग्रेस के कई शीर्ष नेता एक ऐसी घात में मारे गए जिसे सैन्य सटीकता के साथ अंजाम दिया गया था। सूत्रों का मानना है कि इस हमले की रूपरेखा भी हिड़मा के द्वारा की गई थी। यह हमला उसे दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से उठाकर सीधे माओवादी केंद्रीय कमेटी तक ले गया, जो किसी गैर-तेलंगाना आदिवासी के लिए बड़ी उपलब्धि थी.
गुरिल्ला युद्ध का था मास्टरमाइंड–
इस युद्ध के बाद हिड़मा की बटालियन दक्षिण बस्तर की रीढ़ बन गई। उसके दस्ते बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा अन्य नक्सलाइट एरिया के नाम से प्रमुख जाना गया। गुरिल्ला युद्ध की उसकी समझ ने उसके कद को बड़ा बनाया। 2017 के बुरकापाल में 25 सीआरपीएफ जवानों की शहादत हो या मिनपा के टेकुलगुड़ा एरिया में 21 सैनिकों की शहादत, हर घटना ने वही सच दोहराया कि बस्तर में जब भी खून बहता था, हिड़मा की परछाईं ज़्यादा दूर नहीं होती थी।
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्वीट किया –
हिड़मा के आतंक का हुआ अंत, बस्तर में लौट रहा है शांति का वसंत...
छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश सीमा पर सुरक्षाबलों के सफल ऑपरेशन में शीर्ष नक्सली लीडर और सीसी मेम्बर माडवी हिड़मा सहित छह नक्सलियों का न्यूट्रलाइज होना नक्सलवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई में एक निर्णायक उपलब्धि है। इसके लिए हमारे सुरक्षाबल के जवानों के अदम्य साहस को नमन।
हिड़मा वर्षों से बस्तर में रक्तपात, हिंसा और दहशत का चेहरा था। आज उसका अंत न सिर्फ एक ऑपरेशन की उपलब्धि है, बल्कि लाल आतंक पर गहरी चोट है, साथ ही यह क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की हमारी प्रतिबद्धता को और सशक्त करता है।
बीते महीनों में सैकड़ों नक्सलियों का आत्मसमर्पण, टॉप कैडर की गिरफ्तारियाँ और लगातार सफल ऑपरेशन्स बताते हैं कि नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है।
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में हमारी सुशासन सरकार बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई धारा बहा रही है।नियद नेल्ला नार, नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति, नवीन सुरक्षा कैंप की स्थापना, इन कदमों ने जनविश्वास को मजबूत किया है और बस्तर के हर गांव में नया आत्मविश्वास भरा है।
हमें पूरा विश्वास है कि केंद्र–राज्य की संयुक्त रणनीति के साथ मार्च 2026 तक भारत पूर्णतः नक्सलमुक्त होगा।
जय हिंद! जय छत्तीसगढ़!




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