पर्यावरण और राजस्व खनिज विभाग को हो रहा नुकसान तों भी जिम्मेदार विभागीय अधिकारी क्यों है मौन?
बलौदाबाजार (सुघर गांव)। 03 मई 2025,
जिले बलौदाबाजार - भाटापारा के कसडोल विकासखंड के तहसील टूंडरा अंतर्गत ग्राम नवापारा हसुवा, परसापाली, गिधौरी,घटमड़वा कुम्हारी, खपरीडीह और कसडोल, सोनाखान तहसीलों में इन दिनों अवैध ईंट भट्टों की संचालन हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास की स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में ईंट की मांग बढ़ गए है,जिसका फायदा उठाते हुए कई लोगों ने अवैध रूप से व्यावसायिक ईंट निर्माण का काम शुरू कर दिया है। इन ईंट भट्टों से लाखों की संख्या में ईंटें बनाई और बेची जा रही हैं।
जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। कसडोल तहसील के चांटीपाली,दर्रा, चकरबाय,खर्वे,असनीद,खरी,बिलारी तथा आस-पास के गांवों में बड़े पैमाने पर अवैध ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। वहीं सोनाखान तहसील के सोनाखान,महकम, कसौदी, नावागांव और टुण्ड्रा तहसील के नवापारा,परसाडीह, कुम्हारी आदि गांवों में भी यही स्थिति बनी हुई है।
खनिज विभाग द्वारा खानापूर्ति कर किया जा रहा मामूली कारवाई
खनिज विभाग की मामूली कार्यवाही खानापूर्ति से अवैध ईट भट्ठा संचालकों की हौसले बुलंद होते जा रहे है। नियम कहता है कि घर उपयोग के लिए 40 हजार ईंट बना सकते हो लेकीन यहां तो लाखो का ईट बना कर बेचा जा रहा और खनिज विभाग मुखदर्शक बने बैठे हुए है।
खनिज उप निरीक्षक भूपेंद्र भक्त ने कुछ स्थानों में कार्रवाई होने की दी जानकारी
खनिज उप निरीक्षक भूपेंद्र भक्त से जब इस विषय पर चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि चांटीपाली, दर्रा, खर्वे और असनीद के कुछ अवैध भट्टों पर कार्रवाई की गई है। इन पर जुर्माना भी लगाया गया है और अब रॉयल्टी पर्ची जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। खनिज विभाग जब रॉयलटी पर्ची जारी करेगी उतने दिन में अवैध ईट भट्ठा संचालक बनाए गए सभी ईट को बेच कर दूसरे कार्यों में लग जाएं रहेगें। इस साल रॉयाल्टी पर्ची की याद आ रही क्या? राजस्व और खनिज विभाग के नाक के नीचे चल रहें अवैध ईट भट्ठा का बेखौप कार्य। अवैध ईट भट्ठा का बेखौप कारोबार कई वर्षों से चलते आ रहें हैं,फिर भी खनिज और राजस्व विभाग मौन क्यो बैठे हुए हैं।
पर्यावरण विभाग में ईट भट्ठे में अवैध पेड की कटाई उपयोग में लाने की शिकायत पर नहीं हो रहें कार्यवाही
सबसे चिंताजनक स्थिति वन क्षेत्रों की है,जहां अवैध ईंट भट्ठों के पर्यावरण विभाग से कोइ अनुमति नहीं ली है जंगलों से आयुर्वेद अर्जुन पेड (कौहा) की लकड़ी सहित अन्य जरूरी उपयोगी लकड़ी को काट कर ईंट पकाने का कार्य कर रहे हैं। इससे एक ओर पर्यावरण को गहरा नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर वनों का भीषण दोहन हो रहा है। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत वन विभाग से की है। लेकिन वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुआ है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत आने वाले वानंचाल क्षेत्र के सोनाखान,देवपुर,अर्जुनी और लवन परिक्षेत्रों में ईंट भट्ठा संचालक लगातार जंगलों से लकड़ियां चुरा रहे हैं,परंतु इन क्षेत्रों के वन अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो वन विभाग इस मामले में उदासीन है या फिर मिलीभगत की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन अवैध ईंट भट्टों पर शीघ्र और सख्त कार्रवाई की जाए ताकि राजस्व की हानि को रोका जा सके और वन एवं पर्यावरण की सुरक्षा की जा सके।
काले कोयले और सफेद डस्ट,पोल्ट्री फार्म की डस्ट और धान की भूसी मिलाकर गुणवत्ताहीन ईट का हो रहा निर्माण
ईट भट्ठे संचालको द्वारा मिट्टी के साथ प्लांट से जले सफेद और काले कोयले की डस्ट और मुर्गा पोल्ट्री फार्म की मल डस्ट धान की भूसी मिलाकर गुणवत्ताहीन ईट का निर्माण जोरो पर किया जा रहा हैं। ईट भट्ठे के संचालक को पैसे कमाने की नशा सवार हैं जो पर्यावरण राजस्व और खनिज विभाग की नियम कायदे को ताक पर रख कर खेलवाड़ करते आ रहें है। जिस पर छपामार कार्यवाही होने पर अंकुश लग पायेगा। नहीं तों अवैध ईट भट्ठे के संचालको का मनोबल दिनों दिन बढ़ते जाएगा।
0 Comments