ग्राम पंचायत चरौदी में फल फूल रहा अवैध ईंटों का कारोबार

ग्राम पंचायत चरौदी में फल फूल रहा अवैध ईंटों का कारोबार 
 कार्यवाही नहीं होने से ईटभट्ठा संचालक के बढ़ते जा रहे हैं दंबगई 
   सक्ती (सुघर गांव)। 03 मई 2025, जिला सक्ती अंतर्गत मालखरौदा ब्लाक के ग्राम पंचायत चरौदी में भागीरथी प्रजापति के द्वारा अवैध ईंट भट्ठा का संचालन किया जा रहा है। उनके अवैध ईंट भट्टों का कारोबार जोरों पर है। ईंट भट्ठा संचालक शासन - प्रशासन के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बिना लाइसेंस के कई ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। ईंट भट्ठों के संचालक मोटी रकम कमाई कर रहे हैं। इससे शासन - प्रशासन को लाखों रुपये की राजस्व क्षति हो रही है। जिले में ईट भट्टे के कारोबार करने की होड़ मची हुई है। जबकि शासन के निर्देशानुसार ईंट भट्टे लगाने के लिए बाकायदा शासन से अनुमति की आवश्यकता है मगर अनुमति नहीं ली जाती है। ईट भट्टों में आयुर्वेद अर्जुन पेड़ (कौहा) सहित उपयोगी लकड़ी और काले कोयले भूसी मुर्गा पोल्ट्री फार्म की मल डस्ट का उपयोग कर गुणवत्ताहीन मिटटी का ईट बना कर पकाया जाता है। दर्जनों ईट भट्टे नियम विरूद्ध राजस्व खनिज पर्यावरण विभाग की अनुमति प्राप्त किए बिना अवैध रूप से धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। शासन - प्रशासन की नाक के नीचे अवैध ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है और राजस्व और खनिज विभाग के अधिकारी मूक दर्शक बने बैठे हैं। सूत्रों का कहना है कि उनकी मिली भगत से अवैध ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने इन पर कार्रवाई की मांग की है।
   अवैध ईंट भट्ठे संचालकों परआज तक नहीं हुई ठोस कार्यवाही,बढ़ रहे उनके मनोबल
   प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आज तक ग्राम पंचायत चरौदी में इन अवैध कारोबारी के विरूद्ध बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इससे अवैध ईंट बनाने वालों के हौसले बुलंद हैं। कभी कभार छोटी मोटी कार्रवाई होती है मगर बड़े पैमाने पर ईंटों का कारोबार करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से प्रतिवर्ष ईंट भट्टा संचालकों की संख्या बढ़ती जा रही है। 
कई ठेकेदारों द्वारा एक जगह की अनुमति लेने के बाद कई जगहों पर ईंट भट्ठा संचालित किया जाता है। ऐसे ईंट भट्ठों को बंद कराने में खनिज व राजस्व विभाग के अधिकारी अक्षम साबित हो रहे हैं इन अवैध ईटों को पकाने के लिए अधिकांश जगहों पर अवैध कोयला खरीदी कर इसका उपयोग ईट भट्टा संचालकों द्वारा किया जाता है। साथ ही कई जगहों पर बड़े-बड़े वृक्षों की भी बलि चढ़ा दी जाती है।

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