सफेद ध्वजों के साथ श्रद्धालुओं ने दिया सामाजिक समरसता, एकता और भाईचारे का संदेश
आरंग (सुघर गांव)। 27 अक्टूबर 2026, सतनाम के अमर संदेश को जन-जन तक पहुंचाने, सामाजिक एकजुटता को सुदृढ़ करने तथा मानवता, भाईचारे और समरसता की भावना को जनमानस में जागृत करने के उद्देश्य से समस्त सतनामी समाज के नेतृत्व में भव्य सतनाम संदेश पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा में आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। सैकड़ों की संख्या में सफेद ध्वज लेकर शामिल हुए श्रद्धालुओं ने सतनाम के विचारों को आत्मसात करते हुए समाज को एकता और सद्भाव का संदेश दिया। इस भव्य पदयात्रा में स्थानीय विधायक एवं धर्मगुरु खुशवंत साहेब विशेष रूप से शामिल हुए। उनके साथ आसपास के क्षेत्रों के सरपंच, जनपद सदस्य एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता निभाई। समाज के लोगों के उत्साह और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
सतनाम चौक से बारा डेरा धाम तक निकली पदयात्रा
भव्य सतनाम संदेश पदयात्रा का शुभारंभ रावण भाठा स्थित सतनाम चौक, मंदिरहसौद से हुआ। यहां से श्रद्धालु सतनाम के संदेश और सामाजिक सद्भाव की भावना के साथ पवित्र बारा डेरा धाम की ओर रवाना हुए। सफेद ध्वजों से सुसज्जित पदयात्रा में शामिल समाजजनों ने एकजुटता का परिचय देते हुए सतनाम पंथ के मूल विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प प्रदर्शित किया। पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सहभागिता ने सामाजिक एकता और सामूहिक चेतना की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत की। आयोजन में संत समाज की एकजुटता और समाजजनों की सक्रिय भागीदारी ने इसे यादगार स्वरूप प्रदान किया।
समाज सेवा और सतनाम संदेश के प्रचार-प्रसार में संतराम सतनामी की सक्रिय भूमिका
इस पावन पदयात्रा में ग्राम खपरी (बाना) निवासी समर्पित समाजसेवी संतराम सतनामी भी शामिल हुए। वे लंबे समय से समाजसेवा तथा सतनाम के अमर संदेश के प्रचार-प्रसार के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। अपने गांव खपरी के सतनाम गुरुगद्दी भवन में मुख्य पुजारी के रूप में सेवाएं देते हुए वे धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
भव्य सतनाम संदेश पदयात्रा में संत समाज और समाजजनों की सहभागिता ने इस संदेश को और अधिक व्यापकता प्रदान की कि सतनाम केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सत्य, मानवता, समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता पर आधारित जीवन-दर्शन है। ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने के साथ नई पीढ़ी को भी अपने आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं।
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