खपरीपुरी धाम में श्रद्धा और सतनाम संदेश के साथ संपन्न हुआ विजयदशमी गुरु दर्शन मेला

खपरीपुरी धाम में श्रद्धा और सतनाम संदेश के साथ संपन्न हुआ विजयदशमी गुरु दर्शन मेला
   गुरु गद्दी की पूजा-अर्चना, भव्य सतनाम शोभायात्रा और अखाड़ा शौर्य प्रदर्शन ने बांधा समां; संत समागम में गुरु घासीदास बाबा की अमृतवाणी के प्रचार-प्रसार पर दिया गया जोर
    रायपुर (सुघर गांव)। 21 अक्तूबर 2026,
छत्तीसगढ़ की सतनाम धर्म एवं गुरु परंपरा में आस्था के प्रमुख केंद्र खपरीपुरी धाम में 20 अक्टूबर को विजयदशमी के पावन अवसर पर आयोजित संत समागम एवं गुरु दर्शन मेला श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता के वातावरण में संपन्न हुआ। गुरु गद्दीनशीन गुरु मुक्तिदास साहेब, गुरु शक्तिदास साहेब एवं गुरु फालदास साहेब के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में गुरु परंपरा के प्रति आस्था प्रकट करने के साथ सतनाम संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दिखाई दिया।
भव्य शोभायात्रा और अखाड़ा प्रदर्शन बना आकर्षण
विजयदशमी के अवसर पर खपरीपुरी धाम में गुरु गद्दी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। संत समागम की गरिमामय उपस्थिति में भव्य सतनाम शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सतनाम अखाड़े के शौर्य प्रदर्शन, गुरु वंदना और आरती ने धार्मिक वातावरण को विशेष गरिमा प्रदान की। सतनाम के जयघोष और गुरु भक्ति के बीच शोभायात्रा पूरे गांव में भ्रमण करते हुए सतनाम धर्म की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का संदेश देती रही। इस अवसर पर जोड़ा जैतखाम में पालो चढ़ाने की धार्मिक परंपरा भी निभाई गई।
गुरु गद्दी और समाधि स्थलों से जुड़ी है श्रद्धालुओं की आस्था
खपरीपुरी धाम में गुरु निवास के समीप स्थित सतनाम गुरुद्वारा धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यहां गुरु गद्दी, जोड़ा श्वेतखाम की स्थापना के साथ गुरु की सत्साधना का आसन और तालाब परिसर स्थित है। धाम में धर्मगुरुओं एवं गुरु माताओं के समाधि स्थल भी सुव्यवस्थित रूप से स्थापित हैं, जहां गुरु परिवार और सतनाम समाज के श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। धाम में धर्मगुरु अतिबाल दास साहेब, धर्मगुरु असकरण दास साहेब, धर्मगुरु उबारन दास साहेब, धर्मगुरु प्रकाशदास साहेब एवं धर्मगुरु संतनदास साहेब सहित गुरु माताओं सोहगा माता, भगवान्तिन माता और पुरातन माता के समाधि स्थल श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। गुरु दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु इन समाधि स्थलों पर दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं तथा गुरु परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
संतों के सम्मान में सतनाम प्रसादी और भंडारे का आयोजन
गुरु दर्शन मेले के दौरान संतों के सम्मान और सेवा की परंपरा को विशेष महत्व दिया गया। संत समाज के लिए सतनाम प्रसादी एवं भोजन भंडारे का आयोजन कर संत भोज कराया गया। इस आयोजन के माध्यम से गुरु परंपरा में निहित सेवा, समर्पण, आपसी सद्भाव और सामाजिक सहभागिता की भावना को अभिव्यक्त किया गया। धार्मिक आयोजनों में संतों की उपस्थिति और गुरु परिवार की सहभागिता ने खपरीपुरी धाम की आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित किया। यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने गुरु गद्दी के दर्शन कर सतनाम धर्म की परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
     गुरु भक्ति गीत-संगीत से गूंजता रहा धाम
गुरु निवास के समीप स्थित सामाजिक मंच पर दिन-रात गुरु भक्ति गीत-संगीत के माध्यम से धार्मिक वातावरण बना रहा। भजन और गुरु वंदना के जरिए संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा की सत उपदेश अमृतवाणी के प्रचार - प्रसार पर जोर दिया गया। सतनाम संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने और गुरु बाबा के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य रहा।
खपरीपुरी धाम का विजयदशमी गुरु दर्शन मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सतनाम संस्कृति, गुरु परंपरा, संत सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक बना। आयोजन ने गुरुजनों की शिक्षाओं को स्मरण करते हुए सत्य, सदाचार, समानता और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

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