सुभाष टंडन
मस्तूरी। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और घुमंतू पशुओं के संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। अनुविभागीय अधिकारी (रा.) मस्तूरी शिवकुमार कंवर की अध्यक्षता में सोमवार 28 सितंबर को जनपद पंचायत मस्तूरी के सभा कक्ष में समस्त ग्राम पंचायत सचिवों एवं मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गांवों से लेकर नेशनल हाईवे और मुख्य मार्गों पर खुले में घूम रहे पशुओं की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में अधिकारियों ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि ग्राम पंचायतों में बनाए गए पशु बाड़ों में रखे गए घुमंतू पशुओं को प्रतिदिन चराने के लिए चरवाहे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही बाड़ों में मौजूद प्रत्येक पशु के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाए, ताकि पशुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि पशुओं को केवल बाड़े में बंद रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके भोजन, पानी और देखभाल की नियमित व्यवस्था पंचायत स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हाईवे पर पशुओं का जमावड़ा दुर्घटना का बड़ा कारण
समीक्षा बैठक में नेशनल हाईवे एवं प्रमुख मार्गों पर बैठे या घूमते पशुओं को लेकर भी गंभीरता से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे घुमंतू पशुओं को नियमानुसार नजदीकी गौधाम में व्यवस्थित रूप से पहुंचाया जाए, ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सके।
एसडीएम शिवकुमार कंवर ने कहा कि “घुमंतू पशुओं की समस्या केवल पशु संरक्षण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा और आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है। ग्राम पंचायत स्तर पर बाड़ों में पशुओं के लिए चारा-पानी और चरवाहे की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। वहीं मुख्य मार्गों और नेशनल हाईवे पर मिलने वाले पशुओं को नियमानुसार सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कार्रवाई की जाए।”
पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी, मैदानी स्तर पर निगरानी के निर्देश
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मस्तूरी जे.आर. भगत ने कहा कि “सभी ग्राम पंचायत सचिव अपने-अपने क्षेत्र में पशु बाड़ों की नियमित निगरानी करें। बाड़ों में रखे पशुओं के लिए चारा, पानी और चरवाहे की व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मुख्य मार्गों पर घुमंतू पशु पाए जाने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए उन्हें सुरक्षित गौधाम तक पहुंचाया जाए।”
बैठक में प्रशासन की ओर से जन-जागरूकता पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पशुपालक अपने पशुओं को खुले में न छोड़ें और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें। खुले में छोड़े गए पशुओं के कारण न केवल स्वयं पशुओं की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रशासन ने ग्राम पंचायतों, मैदानी कर्मचारियों और पशुपालकों के बीच समन्वय स्थापित कर घुमंतू पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। बैठक में संबंधित अधिकारी-कर्मचारी एवं ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे।


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