मानिकपुर एसईसीएल कोयला खदान की पर्यावरणीय जनसुनवाई।

जिला कोरबा मानिकपुर एसईसीएल कोयला खदान की पर्यावरणीय जनसुनवाई।

3 घंटे में समेट दी गई SECL खदान विस्तार की सुनवाई, ग्रामीणों ने कहा - "फर्जी है" क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट/ जावेद अली आज़ाद





किस बात की जनसुनवाई है–

SECL की मानिकपुर ओपनकास्ट खदान की क्षमता 5.25 MTPA से बढ़ाकर 7.0 MTPA करने के लिए।

आज का विवाद क्या है -

ये जनसुनवाई 21 अगस्त को भी रखी गई थी, पर भू-विस्थापितों के विरोध से स्थगित हो गई थी, परंतु आज 25 सितंबर की नई तारीख को रखी गई थी।

प्रभावित 8 गांवों के ग्रामीण GM ऑफिस के सामने धरने पर बैठे हैं और जनसुनवाई स्थगित करने की मांग कर रहे है।
उनका कहना है - 1963-64 में जमीन अधिग्रहित हुई थी, आज तक कई परिवारों को मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास नहीं मिला, पुरानी मांगे 1964 से लंबित हैं।

 ग्रामीणों की मुख्य मांगें -
1. लंबित मुआवजा का तुरंत भुगतान।
2. जमीन के बदले रोजगार में पात्र युवाओं को प्राथमिकता।
3. निजी ठेका कंपनियों से शोषण बंद हो।
4. मकानों के तोड़े जाने का मूल्यांकन और मुआवजा स्पष्ट किया जाए।




मानिकपुर एसईसीएल प्रबंधन का पक्ष और तैयारी –

प्रबंधन जनसुनवाई को पर्यावरण क्लीयरेंस की औपचारिक प्रक्रिया उत्पादन 5.25 से 7.0 MTPA करना जरूरी है।

21 अगस्त वाली सुनवाई टलने के बाद कलेक्टर और उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी कहा था कि पहले पुराने मुआवजे / पुनर्वास और काचांदी नाला डायवर्जन रिपोर्ट देखी जाए, फिर सुनवाई हो - उसी के बाद 25 सितंबर की तारीख तय हुई।

भू-विस्थापितों का आरोप है कि SECL प्रबंधन निजी ठेका कंपनियों के जरिए रोजगार दे रहा है और 1964 से लंबित मुआवजा / रोजगार पर चुप है, मकानों का मूल्यांकन कितना हुआ, कितना मुआवजा मिलेगा, ये स्पष्ट नहीं बता रहा।

मतलब प्रबंधन का रुख - 

"विस्तार करना है, पुरानी मांगों पर चर्चा जनसुनवाई में कर लेंगे" - जबकि ग्रामीणों का कहना है - पहले पुराना हिसाब दो, फिर नई सुनवाई करो।

मानिकपुर में जनसुनवाई या खानापूर्ति ? 

SECL की मानिकपुर ओपनकास्ट खदान की क्षमता 5.25 MTPA से 7.0 MTPA करने के लिए आज जिला प्रशासन द्वारा आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई जमकर हंगामे और आरोपों में घिर गई। भरी बरसात में दूर-दूर से पहुंचे 8 गांवों के भू-विस्थापितों का आरोप है कि जिला प्रशासन और SECL प्रबंधन ने सांठगांठ कर पूरी जनसुनवाई को सिर्फ 3 घंटे में खत्म कर दिया।

जनसुनवाई स्थल पर मीडिया से बात करते हुए भू-विस्थापितों के अधिवक्ता दिलीप मिरी ने कहा -

बहुत उम्मीद के साथ आज लोग भरे बरसात में यहां आए थे। जनता अपने वक्तव्य देना चाहती थी, स्थानीय रोजगार, भू-स्थापित, पर्यावरण, नौकरी तमाम समस्याएं रखना चाहती थी। लेकिन यहां के जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग के मुख्य अधिकारी और SECL के अधिकारी पूरी तरह सांठगांठ करते हुए ये टोटल फर्जी जनसुनवाई कर रहे हैं। जनता को कोई हद नहीं, हम बहुत सारी आपत्तियां दर्ज कराते रहे, बीच-बीच में ही प्रशासन ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि कोई भी जनता अपनी आवाज न रख सके। ये जनता की आवाज दबाने की पूरी कोशिश है। पर्यावरण संबंधित अन्य मामलों पर सुनवाई तो हो नहीं रही परंतु यह "जनसुनवाई नहीं" जनसुनवाई घोटाला जैसी प्रतीत हो रही है।

3 घंटे में समेट दी गई SECL खदान विस्तार की सुनवाई, ग्रामीणों ने कहा - "फर्जी है" 
क्या है पूरा मामला?

मानिकपुर खदान विस्तार की ये दूसरी जनसुनवाई थी। पहली जनसुनवाई 21 अगस्त को ग्रामीणों के विरोध के चलते स्थगित हो गई थी। ग्रामीणों की मांग है कि 1963-64 से लंबित मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास के मामले सुलझाए बिना नई खदान का विस्तार न किया जाए। प्रशासन ने आज सुबह 10.00 बजे से सुनवाई शुरू की थी, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक दोपहर तक ही उसे समेट दिया गया। लिखित आपत्तियां भी पूरी तरह नहीं ली गईं।









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