"कोरबा जिला शासकीय अस्पताल: थाली में कीड़े-धान के छिलके, वार्ड में गार्ड की गुंडागर्दी — मरीजों की सेवा के नाम पर हो रहा मजाक"

 "कोरबा जिला शासकीय अस्पताल: थाली में कीड़े-धान के छिलके, वार्ड में गार्ड की गुंडागर्दी — मरीजों की सेवा के नाम पर हो रहा मजाक"



जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो प्रमुख छ.ग.

कोरबा(सुघर गांव)। "स्वस्थ कोरबा, स्वस्थ छत्तीसगढ़" के नारे के बीच शासकीय जिला चिकित्सालय कोरबा की सच्चाई शर्मसार कर देने वाली है। यहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के साथ-साथ भूख और अपमान भी झेलना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा परोसे जा रहे भोजन में कीड़े और धान के छिलके मिल रहे हैं, वहीं सुरक्षा के नाम पर तैनात गार्डों का अनैतिक और अमानवीय व्यवहार आम हो गया है।

खाने की थाली में दवा नहीं, गंदगी– 

पिछले 10 दिनों से मरीजों और तीमारदारों ने बार-बार शिकायत की है कि सुबह-शाम बांटा जाने वाला खाना खाने लायक नहीं है।


- दाल में कीड़े : कई बार दाल की कड़ाही में छोटे-छोटे काले कीड़े तैरते पाए गए।


- चावल में धान के छिलके और कंकड़ : चावल को बिना साफ किए ही पका दिया जाता है। थाली में छिलके मुंह में आते हैं। 


- बिना ढके परोसना : खाना खुली ट्रॉली में लाया जाता है। उस पर मक्खियां बैठी रहती हैं।

सर्जिकल वार्ड में भर्ती एक मरीज के परिजन ने कहा, "डॉक्टर कहते हैं पौष्टिक आहार दो। यहां कीड़ा वाला खाना देखकर भूख ही मर जाती है। शिकायत करो तो कोई सुनने वाला नहीं।"



सुरक्षा नहीं, तानाशाही–

समस्या सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। अस्पताल में सुरक्षा के नाम पर तैनात कुछ गार्डों का व्यवहार सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। रात में तैनात गार्ड मरीजों के परिजनों से अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज करते हैं। पानी, कंबल मांगने पर "यह होटल नहीं है" कहकर भगा दिया जाता है। 2 दिन पहले महिला वार्ड के बाहर एक महिला तीमारदार के साथ बदतमीजी और दुर्व्यवहार भी हुई। गार्ड का कहना था "यहां शोर मत करो, वरना बाहर निकाल दूंगी।"

प्रबंधन मौन, जवाबदेही शून्य–

इतनी गंभीर शिकायतों के बाद भी कोरबा शासकीय जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। न भोजन सप्लाई करने वाली एजेंसी पर जुर्माना लगा, न ही बदतमीजी करने वाले गार्डों के खिलाफ कोई कदम उठाया गया। चिकित्सकों का कहना है कि भर्ती मरीजों को संक्रमण का खतरा पहले से ज्यादा होता है। ऐसे में दूषित भोजन सीधे उनकी जान से खिलवाड़ है।

अब और नहीं सहेगा कोरबा–

जनता के पैसे से चलने वाले इस अस्पताल में अगर बुनियादी इज्जत और साफ खाना भी नहीं मिल सकता तो व्यवस्था पर सवाल उठना तय है।

मांग–

1.  कलेक्टर और CMHO तत्काल जांच कराकर दोषी एजेंसी और गार्डों पर कार्रवाई करें।  

2.  भोजन की गुणवत्ता की थर्ड-पार्टी जांच और रोजाना सैंपलिंग हो।  

3.  हर वार्ड में शिकायत रजिस्टर और हेल्पडेस्क शुरू किया जाए।  

अस्पताल "सेवा का मंदिर" है या "लापरवाही का अड्डा" — इसका जवाब अब कोरबा शासकीय जिला चिकित्सालय प्रबंधन को देना होगा।

Post a Comment

0 Comments