भू-विस्थापितों के हक की लड़ाई दिल्ली पहुंची सांसद ज्योत्सना महंत ने अनुराग ठाकुर से की मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार पर कार्रवाई की मांग

 विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ

 कोरबा (सुघर गांव) । एसईसीएल की कुसमुंडा, गेवरा और दीपका खदान परियोजनाओं से प्रभावित हजारों भू-विस्थापित परिवारों की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर सांसद ज्योत्सना महंत ने दिल्ली में कोल एंड स्टील माइंस कमेटी के चेयरमैन अनुराग ठाकुर से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों की ओर से विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए लंबित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की।
🔹 सांसद ज्योत्सना महंत ने संभाला मोर्चा
सांसद महंत ने बताया कि वर्ष 2009-10 से एसईसीएल द्वारा 60 से अधिक गांवों की भूमि अधिग्रहित की गई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार आज भी अपने अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
🔹 मुआवजा और पुनर्वास बना बड़ा मुद्दा
कई परिवारों को अब तक पूर्ण मुआवजा नहीं मिला है, जबकि पुनर्वास की प्रक्रिया भी अधूरी है। सांसद ने ग्रामीणों की मांग के अनुरूप पुनर्वास स्थलों को स्वीकृति देने और लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने की मांग उठाई।
🔹 रोजगार और आजीविका की मांग
रोजगार श्रेणी से बाहर रह गए परिवारों तथा स्थानीय युवाओं को एसईसीएल में प्राथमिकता देने और वैकल्पिक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया, ताकि प्रभावित परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।
🔹 प्रदूषण और विकास कार्यों पर उठे सवाल 
खदानों से फैल रहे वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए प्रभावी उपाय करने तथा डीएमएफ और सीएसआर निधि का उपयोग प्रभावित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी सुविधाओं पर पारदर्शी ढंग से करने की मांग की गई।

मुलाकात के दौरान अनुराग ठाकुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मंत्रालयों से समन्वय कर समस्याओं के समाधान की दिशा में आवश्यक पहल का आश्वासन दिया।

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