मुंगेली - जिले के ग्राम संगवाकापा से मंगलवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां खेत में काम कर रहे एक किसान की बिजली करंट की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों में बिजली विभाग की लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
रात की आंधी-बारिश में टूटा था तार मिली जानकारी के अनुसार, मृतक किसान जितेंद्र कुमार कोशले (40 वर्ष), पिता स्वर्गीय मूलचंद कोशले, ग्राम संगवाकापा के निवासी थे। बताया जा रहा है कि 29 जून की रात क्षेत्र में तेज आंधी और मूसलाधार बारिश हुई थी। इस खराब मौसम के चलते खेत के पास से गुजर रही बिजली लाइन का हाई-टेंशन तार टूटकर जमीन पर गिर गया था। रात के अंधेरे और सूनसान इलाके में होने के कारण किसी की नजर उस टूटे तार पर नहीं पड़ सकी।
सुबह कृषि कार्य के दौरान हुआ हादसा मंगलवार सुबह लगभग 9 बजे, जितेंद्र कुमार कोशले रोज की तरह अपने खेत में कृषि कार्य करने पहुंचे थे। खेत में काम करने के दौरान वे अनजाने में जमीन पर गिरे बिजली के तार के बेहद करीब चले गए और उसके संपर्क में आ गए। तार में विद्युत प्रवाह (करंट) चालू होने के कारण वे उसकी चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास के खेतों में मौजूद लोगों ने जब उन्हें तड़पते देखा तो तत्काल लाइन बंद कराने और उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जितेंद्र ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, ग्रामीणों में आक्रोश
घटना की सूचना मिलते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए। परिजनों को जैसे ही इस हादसे की जानकारी मिली, घर में कोहराम मच गया। मृतक जितेंद्र अपने परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य और प्रमुख सहारा थे। उनकी इस असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीण इस घटना के लिए बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, क्योंकि लाइन कटने या तार टूटने के बाद भी सप्लाई बंद नहीं की गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
यह हादसा एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा व्यवस्था और विभाग की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बरसात के मौसम में खुले या टूटे बिजली के तार किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग के लिए यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि समय रहते संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं और पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए और ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
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