कोरबा में 'हरे सोने' की महक ग्रामीण क्षेत्रों में पान की तोड़ाई और खरीदी-बिक्री का शंखनाद जिले के पान किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक, बाड़ियों से मंडियों तक चहल-पहल शुरू


 विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ

 कोरबा (सुघर गांव) औद्योगिक नगरी के साथ-साथ कृषि संपदा से समृद्ध कोरबा जिले के ग्रामीण अंचलों में आज से 'हरे सोने' यानी पान के पत्तों की तोड़ाई और व्यापार का विधिवत आगाज़ हो गया है। भीषण गर्मी के बीच कड़ी मेहनत से तैयार हुई पान की फसल अब किसानों के घरों में खुशहाली लाने को तैयार है। जिले के प्रमुख पान उत्पादक क्षेत्रों में सुबह से ही बाड़ियों में रौनक देखी गई, जहाँ किसान और मजदूर पत्तों की तोड़ाई और उनकी छंटाई में जुटे रहे।
 बाड़ियों से मंडियों तक पहुँचा 'हरा सोना' जिले के विभिन्न विकासखंडों के ग्रामीण क्षेत्रों में पान की खेती बहुतायत में की जाती है। यहाँ के पान की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण इसकी मांग न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पड़ोसी जिलों में भी रहती है। आज सीजन के पहले दिन भारी मात्रा में पान के पुड़ा मंडियों में पहुँचे। व्यापारियों ने भी बढ़-चढ़कर खरीदी में हिस्सा लिया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बार फिर तेजी आने की उम्मीद जगी है।
 परंपरा और चुनौतियों के बीच व्यापार पान की तोड़ाई शुरू होने के साथ ही मंडियों में पुराने रीति-रिवाजों के अनुसार खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। हालांकि, किसान इस दौरान होने वाली 'सरा' (अतिरिक्त पुड़ा) जैसी व्यवस्थाओं को लेकर सचेत दिखे। जानकारों का कहना है कि पान एक बेहद संवेदनशील फसल है, जिसे किसान 'बेटे' की तरह पालते हैं, तब जाकर यह 'हरा सोना' बेचने लायक तैयार होता है।
 किसानों को अच्छे मुनाफे की उम्मीद इस वर्ष मौसम की मार और पानी की किल्लत के बावजूद किसानों ने अपनी मेहनत से फसल को बचाए रखा है। आज से शुरू हुई आधिकारिक खरीदी को देखते हुए किसानों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें उपज का सही और वाजिब दाम मिलेगा।
 मुख्य अंश 
👉 तोड़ाई का समय सुबह तड़के से ही बाड़ियों में शुरू हुई काम।
 👉 आर्थिक आधार सैकड़ों परिवारों की जीविका का मुख्य साधन है पान।
 👉 बाजार की स्थिति शुरुआती दिन में मांग और आपूर्ति के बीच अच्छा तालमेल।

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