मेंटल बेटे और उसकी मां व अन्य बच्चों के साथ आरोपियों ने की सामूहिक मारपीट।
मेंटल युवक (मानसिक रोगी) को फर्जी मारपीट के आरोप में भेजा जेल।
शासन प्रशासन की ओर से युवक के इलाज से संबंधित कोई सहायता व राहत नहीं मिली।
जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो छत्तीसगढ़
कोरबा(सुघर गांव)। जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। मेंटल स्थिति (मानसिक रोग) से गुजर रहा एक युवक और उसकी मां तथा उसके दो बेटियों के साथ मोहल्ले वासियों ने मिलकर ताबड़तोड़ सामूहिक जानलेवा हमला किया है। मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को चोट पहुंचाने की मनसा को लेकर मोहल्ले के तीन युवकों के साथ अन्य लोगों ने अपने हाथ पर पकड़े स्टील का रॉड और ईंट फेंककर जान से मारने की कोशिश की। वही कुछ लोग घटना स्थल पर बीच बचाव करते नजर आ रहे है।
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जानकारी के अनुसार जिले के गेरवा घाट स्थित अटल आवास में निवास कर रही एक सक्षम गृहिणी महिला ने मीडिया से वार्ता कर बताया कि वह अपने स्वयं के घर पर ही रहकर गृहस्थी सम्हाल रही है। पीड़ित महिला के साथ दो पुत्र और दो पुत्रियां निवास कर रही हैं। उनके पति बाहर में कुछ काम से बाहर गए हैं जिसका फायदा उठाकर मारपीट किया जा रहा। वे सभी अपने घर पर ही थे कि दिनांक 06.05.2026 को सुबह करीबन 07.30 बजे रिजवान खान मानसिक स्वास्थ्य को मारने के नाम पर घर में घुसकर मोहल्ले के व्यक्ति जुम्मन अंसारी, सावंत चौहान, दिपेश चौहान, नसीम अंसारी ने सामूहिक मारपीट किया, शराब का सेवन कर बिना किसी कारण के (महिला) व चारों बच्चों को मां बहन की गंदी गंदी गाली, गलौज कर जान से मारने की धमकी देते हुए बाल पकड़कर हाथ से चेहरे व अन्य हिस्सों कई जगहों पर मारपीट किये है। जिससे होंठ फट गए और खून निकल आया। इसी दौरान बीच बचाव करने आये चारों बच्चों के साथ भी गंदी–गंदी गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी दिया। मारपीट से सिर में, हाथ के हथेली में चोट लगा है। बेटी के दाहिने कोहनी दाहिने जांग में, गला में चोटें आई है। मारपीट कर रहे लोगों नसीम अंसारी ने शराब के नशे में दोनों बेटियों को छेड़छाड़ करते हुए दोनों लड़कियों की गरिमा को ठेस पहुंचाया है। जिस संबंध में रूची सारथी, साहील यादव व आस–पास के लोग देखे है।
सामूहिक मारपीट करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कोरबा कोतवाली में एफआईआर दर्ज–
कोरबा कोतवाली पुलिस ने सामूहिक मारपीट करने वाले व्यक्ति जुम्मन अंसारी, सावंत चौहान दीपेश चौहान व अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 बीएनएस की धारा के तहत 296, 351(3), 115 (2), 3(5) अपराध दर्ज किया गया है।
मानसिक रोगी का ईलाज, समाज और पुलिस रिमांड का खेल.. क्या है मामला.?
महिला ने अपने पुत्र की मानसिक स्थिति को देखते हुए कोरबा कलेक्टर, एसपी और कोरबा जिला सत्र न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत की थी। जिस संबंध में कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े स्टेट मेंटल हॉस्पिटल सेंदरी में लंबे समय से चल रहे मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का इलाज कराने के नाम पर भर्ती करवाया गया। कुछ दिन उस व्यक्ति का इलाज किया गया, परंतु अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से सही ईलाज करने के नाम पर खानापूर्ति करते कागजी पन्नों में डिस्चार्ज कर दिया गया। छत्तीसगढ़ में इतने बड़े मेंटल हॉस्पिटल होने के बावजूद मानसिक रोगियों का सही इलाज नहीं किया जा रहा आखिर क्यों.?
समाज में मेंटल व्यक्तियों के ऊपर सहानुभूति आखिर क्यों नहीं–
किसी व्यक्ति का मेंटल होना एक प्राकृतिक पीड़ा है और वह व्यक्ति पूरी तरीके से अपने परिवार के लोगों पर निर्भर है। एक मिडिल क्लास का परिवार पालन पोषण बड़ी मुश्किल से कर पाती है, वहीं दूसरी ओर परिवार में किसी व्यक्ति का मेंटल होना सबसे बड़ी समस्या है। परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण ऐसे व्यक्तियों का इलाज करवा पाना संभव नहीं है, अगर शासकीय सेवाएं भी ली जा रही है तो अस्पतालों में सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रही। वही समाज मेंटल व्यक्तियों को घृणा की नजर से देखती है। दूसरी ओर उन्हें उस व्यक्ति से अपने जान–माल की हानि जैसी संभावना प्रतीत होती है। समाज के बीच वह पीड़ित व्यक्ति अकेला हो जाता है और परिवार भी कहीं ना कहीं उसकी परेशानियों को देखकर दुख–दर्द से गुजरती है। ऐसे में शासन प्रशासन सहायता और सामाजिक सहयोग, डोनेशन सामाजिक व्यक्तियों के द्वारा की जाती है तो संभवत: पीड़ित व्यक्ति का इलाज संभव है। लोगों को ऐसे मामलों पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए जिससे कि समाज में एक अलग ही संदेश देखने को मिले।
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सावधान: इस मामले पर जिले में बड़े अखबार और पोर्टल में गलत खबर प्रकाशित कर रहे।
मामले की सत्यता से परे कुछ बड़े अखबार और पोर्टल से जुड़े पत्रकार इस मामले को लेकर गलत खबर प्रकाशित कर रहे हैं। टीआरपी के चक्कर में तथा ग्राउंड रिपोर्टिंग करने के बजाय भ्रामक खबर प्रकाशित कर समाज में गलत संदेश देते हुए सच्चाई को दबाया जा रहा है।
पुलिस ने आखिर क्यों किया गिरफ्तार–
कानून और नियम:–
1. BNSS, 2023 के तहत पुलिस किसी भी आरोपी का 15 दिन तक रिमांड मांग सकती है।
2. पर बड़ी शर्त है: गिरफ्तारी के तुरंत बाद मेडिकल होना जरूरी है। अगर डॉक्टर कह दे कि व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है और पूछताछ के लायक नहीं, तो मजिस्ट्रेट रिमांड नहीं देगा।
3. Mental Healthcare Act, 2017 कहता है कि मानसिक रोगी को टॉर्चर नहीं कर सकते। उसका इलाज कराना पुलिस की जिम्मेदारी है।
4. BNSS धारा 369 : ट्रायल के दौरान अगर पता चले कि आरोपी पागल है तो केस रोककर पहले उसका इलाज होगा।
5. BNS धारा 22 : अगर अपराध करते समय व्यक्ति पागलपन के कारण सही-गलत नहीं समझ पा रहा था, तो उसे सजा नहीं होगी। कोर्ट उसे मेंटल हॉस्पिटल भेज देगा।
मतलब पुलिस कागजी तौर पर रिमांड मांग सकती है, लेकिन कोर्ट मेडिकल रिपोर्ट देखकर ही फैसला करेगा। ज्यादातर केस में ऐसे व्यक्ति को रिमांड की जगह इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाता है।







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