ग्राम– पाली के ग्रामीण जल संकट से जूझ रहे, वहीं एसईसीएल कुसमुंडा के आलाअधिकारी खा रहे एसी की हवा.
जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो छ.ग.
कोरबा(सुघर गांव)। कटघोरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पाली में ग्रामीणों से लेकर पालतू पशु पक्षी पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। चिलचिलाती गर्मियों से उन्हें राहत दिलाने के नाम पर एसईसीएल कुसमुंडा ने ग्राम पाली में ही बनी एक तालाब में जल आपूर्ति करने के नाम पर बोर करवाया तथा पाइपलाइन भी बिछाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि एक सप्ताह तक तालाब में जल आपूर्ति हुई। 1 सप्ताह बाद बोर खराब हो गई और पानी का सप्लाई पूरी तरह से बंद हो गया। यह घटना को करीब दो माह हो चुकी है परंतु एसईसीएल कुसमुंडा के द्वारा नहीं बोर बनवाई गई और ना ही किसी प्रकार की कोई पानी की सप्लाई करवाई गई जिससे कि गांव में निवास कर रहे ग्रामीण तथा पालतू पशु पक्षी पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। गांव में पानी का संकट से जूझ रहे ग्रामीणों की बातों को अनदेखा करते हुए एसईसीएल के आला अधिकारी शासन से मिली डीएमएफ मद की राशि को गबन कर रहे हैं।
ग्रामीणों की जमीनों को कब्जा करने के बहाने एसईसीएल ने की तालाब में जल आपूर्ति..
एसईसीएल कुसमुंडा की खुली कोयला खदान गांव के बहुत करीब आ चुकी है। ग्रामीणों की जमीनों को कब्जा करने के बहाने किसानों को लुभावने प्रलोभन देकर उपजाऊ भूमियों में बुलडोजर चला कर खेतों को मैदान बना दिया गया। हैवी ब्लास्टिंग और रासायनिक धूल डस्ट उड़ने से समूचा गांव सहित आसपास के क्षेत्र पूरी तरह पर्यावरण प्रदूषण से प्रभावित हो चुकी है। कोयला खदान निकट होने के कारण ग्रामीणों में लगातार स्वास्थ्य संकट बनी रहती है।
इसी प्रकार इस तेज गर्मी और धूप में एसईसीएल कुसमुंडा पाली के ग्रामीणों के साथ जल आपूर्ति करने के नाम पर खानापूर्ति करते हुए एक प्रकार से अन्याय और अत्याचार कर रही। पालतू पशु पक्षियां दूसरे गांव की ओर पलायन कर रही। तेज गर्मी और पानी के अभाव के कारण जंगली जानवर भूखे प्यासे इधर उधर भटकते ग्रामीणों के घरों में घुस रहे। परंतु एसईसीएल कुसमुंडा के आला अधिकारीयों को जल संकट दिखाई नहीं दे रहा वह अपने कार्यालय में बैठकर (एसी) हवा खा रहे। उन्हें सिर्फ कोयला प्रोटेक्शन का कार्य और खुद का प्रॉफिट देखना है। और किस तरह से ग्रामीणों को बेवकूफ बनाकर जमीनों को कब्जा करते हुए अपना परिवार और रोजी-रोटी चलानी है। जिला प्रशासन को ऐसे भ्रष्ट आला अधिकारियों के ऊपर मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।



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