हाईस्कूल में विवादित प्राचार्य की नियुक्ति पर फिर उठे सवाल धारा 41(2)/109 के तहत कार्रवाई, जेल तक पहुंचे थे प्राचार्य; फिर भी छात्राओं वाले स्कूल में पदस्थापना पर विवाद


विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो

कोरबा (सुघर गांव) पाली हाईस्कूल में प्राचार्य मनोज सराफ की पदस्थापना एक बार फिर विवादों में आ गई है। 2018 में तानाखार हाईस्कूल में पदस्थ रहते हुए सराफ को एक युवती के साथ संदिग्ध परिस्थिति में पाए जाने पर ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। 
क्या था पूरा मामला पुलिस ने प्राचार्य मनोज सराफ के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41(2) एवं 109 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी। ये धाराएं ऐसे व्यक्ति पर लगाई जाती हैं जिसकी गतिविधियां शांति भंग करने वाली या संदिग्ध मानी जाती हैं। सराफ को एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां जमानत निरस्त होने के बाद उन्हें लगभग 67 घंटे जेल में रहना पड़ा था।
निलंबन के बाद भी संवेदनशील पद पर वापसी घटना के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत उन्हें निलंबित किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मनोज सराफ को छात्राओं की अधिक संख्या वाले स्कूल में पदस्थ न किया जाए। इसके बावजूद वर्ष 2019-20 में उनकी नियुक्ति पाली हाईस्कूल में कर दी गई, जहां छात्राओं की संख्या अधिक है।
छात्र-छात्राओं का विरोध, फिर भी वापसी पदस्थापना के समय छात्र-छात्राओं और पालकों ने विरोध दर्ज कराया था। विवाद बढ़ने पर 2022 में उनका तबादला किया गया, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें पुनः पाली हाईस्कूल में पदस्थ कर दिया गया।
प्रशासनिक निर्णयों पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि जेल, निलंबन और कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद एक विवादित प्राचार्य को छात्राओं वाले स्कूल में बार-बार पदस्थ करना प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। पालक संघ ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है।
जांच और कार्रवाई की मांग मामले के तूल पकड़ने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। पालकों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से प्राचार्य को तत्काल हटाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। 

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जानकारी ली जा रही है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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