कोरबा जिला पंचायत में ‘फंड फॉर्मूला’ पर फूटा असंतोष, अंदरखाने गहराया टकराव वित्तीय बंटवारे में पारदर्शिता पर सवाल, सदस्यों ने चेताया—अब आर-पार की लड़ाई संभव

विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ 

कोरबा (सुघर गांव) कोरबा जिला पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि के वितरण को लेकर विवाद अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर सियासी रंग लेने लगा है। कई सदस्यों ने आरोप लगाया है कि फंड आवंटन में नियमों की अनदेखी कर चुनिंदा क्षेत्रों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इससे पंचायत के भीतर असंतोष और अविश्वास का माहौल बन गया है। हालांकि हाल ही में जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग के साथ हुई चर्चा के बाद प्रस्तावित धरना फिलहाल टल गया, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी शांति मानी जा रही है। अंदरखाने असंतोष लगातार उबल रहा है और आने वाले दिनों में बड़ा विरोध देखने को मिल सकता है। मुख्य बिंदु विस्तार से
फंड बंटवारे में असमानता का आरोप सदस्यों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए राशि वितरण में संतुलन नहीं रखा गया, जिससे कई क्षेत्रों की अनदेखी हुई है।
महिला प्रतिनिधियों की नाराज़गी कुछ महिला सदस्यों ने गुमनाम रहते हुए फंड के दुरुपयोग और व्यक्तिगत हित साधने के आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
योजनाओं में कमीशनखोरी का मुद्दा मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में कथित प्रतिशत आधारित लेन-देन की चर्चा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चेतावनी के साथ रणनीतिक चुप्पी फिलहाल धरना स्थगित है, लेकिन सदस्यों ने साफ किया है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालता है या मामला और तूल पकड़ता है।

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