श्रमसेवा भूविस्थापित कामगार संगठन ने किया भोग(प्रसाद) और शुद्ध शीतल पेयजल वितरण.

श्रमसेवा भूविस्थापित कामगार संगठन ने किया भोग(प्रसाद) और शुद्ध शीतल पेयजल वितरण.

निस्वार्थ भाव से नेक कार्य करना, मानवता का अद्भुत मिसाल.

 

जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो प्रमुख।

कोरबा(सुघर गांव)। सर्व मंगल मांगल्ये देवी दुर्गा का एक अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी मंत्र है, जो सभी प्रकार के शुभ कार्यों, सौभाग्य, समृद्धि और शांति के लिए जपा जाता है। यह मंत्र माँ दुर्गा को समर्पित है, जो कल्याणकारी, सर्वशक्तिमान और रक्षक हैं। कोरबा जिले में विराजमान मां सर्वमंगला देवी के आशीर्वाद से नवरात्रि के पावन उपलक्ष्य में, श्रमसेवा भूविस्थापित कामगार संगठन के कार्यकर्ताओं ने आम जनों व राहगीरों के लिए नि:शुल्क भोग (प्रसाद) और शुद्ध मीठा शीतल पेयजल का वितरण किया। इस सेवा कार्य में नींबू के रस रसना, शक्कर और बर्फ से मिश्रित शुद्ध शीतल पेयजल, खिचड़ी जैसे पारंपरिक भोग के माध्यम से जनमानस व राहगीरों को राहत पहुंचाई गई। यह पहल सामाजिक समरसता और भक्ति का अनूठा उदाहरण है। नौ दिनों में विभिन्न दिनों पर मां सर्वमंगला को समर्पित विशेष भोग व शीतल जल का वितरण किया गया, जिसमें खिचड़ी और मीठा जल मुख्य हैं।

निस्वार्थ भाव से समाज के प्रति अपने दायित्व के रूप में– श्रमसेवा भूविस्थापित कामगार संगठन.

इस भीषण गर्मी में आमलोगों और राहगीरों को शीतल पेयजल पिलाना एक निस्वार्थ और पुण्यमयी सेवा है, जो प्यासों को राहत प्रदान करती है। यह सेवा विशेषकर गर्मियों में प्यास बुझाने का काम करती है और श्रम सेवा भूविस्थापित कामगार संगठन निस्वार्थ भाव से समाज के प्रति अपने दायित्व के रूप में यह नेक कार्य लगातार कई वर्षों से करते आ हैं। यह सेवा मानवता का संदेश देती है। यह सेवा समाज में भाईचारा और एक-दूसरे की मदद करने का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में पानी पिलाना सबसे बड़े पुण्यों में से एक माना जाता है, जो जीवन रक्षक के रूप में कार्य करता है। भीषण गर्मी में शीतल जल उपलब्ध कराना न केवल शारीरिक राहत देता है, बल्कि यह सेवा की भावना को भी दर्शाता है। यह एक साधारण लेकिन बेहद प्रभावशाली पहल है, जो यह याद दिलाती है कि मदद के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि नेक नीयत की आवश्यकता होती है।

Post a Comment

0 Comments