जिला बलरामपुर क्षेत्रांतर्गत बसंतपुर थाना प्रभारी ने रिश्वतखोरी को अंजाम देकर पत्रकार को भेजा नोटिस.

जिला बलरामपुर क्षेत्रांतर्गत बसंतपुर थाना प्रभारी ने रिश्वतखोरी को अंजाम देकर पत्रकार को भेजा नोटिस.

दूसरी ओर जिला कोरिया क्षेत्रांतर्गत थाना सोनहत के थाना प्रभारी ने पीड़ित पत्रकार का एफआईआर दर्ज करने से किया साफ इंकार..



रिपोर्ट/जावेद अली आज़ाद 

रायपुर(सुघर गांव)। जिला बलरामपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बसंतपुर थाना प्रभारी के द्वारा चोरी के एक मामले में आरोपियों को छोड़ने और अवैध वसूली की सनसनी खबर सामने आई है। जिसकी एक समाचार में खबर प्रकाशित कर पुष्टि की गई है।खबर के प्रकाशित होते ही थाना प्रभारी की अवैध कार्यशैली पर सवाल उत्पन्न होने को लेकर संबंधित क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। जिस खबर को भ्रामक, असत्य और निराधार बताते हुए बसंतपुर थाना प्रभारी के द्वारा खबर प्रकाशन के संबंध में पत्रकार राम हरी गुप्ता को नोटिस जारी कर भेजा गया।

नोटिस में कहा गया है कि भारत सम्मान चैनल और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित समाचार असत्य और भ्रामक है तथा इससे शासकीय सेवक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। नोटिस में तीन दिनों के भीतर थाना बसंतपुर में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

रक्षक बन रहे लगातार भक्षक..

कोई शासकीय पुलिस अधिकारी स्वयं आरोपी है, क्या उसे स्वयं अधिकार है किसी पत्रकार को नोटिस भेजने का.?

अब सवाल यह बनता है कि जिस पुलिस अधिकारी के ऊपर 10हजार रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे हो, क्या वही अधिकारी स्वयं नोटिस जारी कर सकता है.? अधिकारी के द्वारा अपने मान, सम्मान, प्रतिष्ठा, पद और पुलिस अधिकारी होने का एक जोरदार दबाव बनाकर पत्रकार की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। स्वयं को बेदाग और लगे आरोप का खंडन किया जा रहा है। जानकारी मिली है कि स्थानीय निवासियों ने इस मामले की घोर निंदा करते हुए उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच करने की बात कही गई है। ना कि पत्रकार की आवाज को दबाने का प्रयास कर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया में इस तरह के खबर वायरल होने से एक बार फिर पुलिस की कार्यशैलियों सवाल उत्पन्न हो रहे हैं। 



वहीं दूसरी ओर कोरिया के क्षेत्र अंतर्गत, ग्राम सोनहत के थाना प्रभारी ने एफआईआर दर्ज करने से किया इनकार, पत्रकार से मारपीट का मामला।

दोनों मामले सोशल मीडिया पर तेजी से हो रहे वायरल..

जानकारी मिली है कि एक कथित पत्रकार ने सच उजागर किया जो उसे भारी पड़ गया। करीब 2 महीने पूर्व पुरानी खबर को लेकर स्थानीय पत्रकार शैलेश गुप्ता पर सार्वजनिक जगह में सार्वजनिक तौर पर असामाजिक तत्वों ने लोहा, रॉड, डंडे, चाकू और धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला किया गया है। स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्ष दर्शियों ने पत्रकार शैलेश का बीच बचाव किया। किसी तरह पीड़ित शैलेश अपना जान बचाकर वहां से चला गया। शैलेश के सिर पर तथा शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई है।पत्रकार अपने परिजनों के साथ सोनहत थाना पहुंचे। थाना प्रभारी अपने थाने में मौजूद नहीं थे। और उनके स्टाफ सादे कागज पर पीड़ित का बयान लिखते रहे। पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि बयान दर्ज करने के बजाय उल्टा पत्रकार शैलेश के ऊपर दबाव डालते हुए कड़ी पूछता शुरू कर दी। बार-बार एफआईआर की मांग की जाती रही। जिस दौरान संबंधित पुलिस स्टाफ के द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं करने की बात करते हुए मौजूद महिलाओं के साथ बदतमीजी और अभद्रता करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 

संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज नहीं करने पर एसपी से लगाई गुहार 

पीड़ित ने लिखित शिकायत कर एसपी को मामले से अवगत कराया है। एसपी ने इस मामले का निष्पक्ष जांच और दोषियों के ऊपर कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

क्या है मामला–

जानकारी मिली है कि पशु तस्करी से यह मामला संबंधित है। सोनहत क्षेत्र में रात के समय पशु तस्करी की शिकायत लगातार में मिल रही थी। इस मुद्दे को लेकर कथित पत्रकार शैलेश ने व्हाट्सएप पर पोस्ट की थी। माना जा रहा है कि यही पोस्ट हमले की वजह बनी।

पत्रकारों को डरा धमका कर झूठे मुकदमे में फंसाने का कार्य करना बंद करें, कानून किसी के बाप की जागीर नहीं,चौथे स्तंभ और सत्य को दबाने का प्रयास.

छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त पुलिस अधिकारियों को वर्दी इसलिए नहीं मिली कि कुछ पुलिस वाले अपने वर्दी का दुरुपयोग कर बेकसूर, बेगुनाह, निर्दोष व्यक्तियों को डरा धमकाकर नोटिस भेजने अन्यथा उनके ऊपर फर्जी एफआईआर करें। अगर कोई पुलिस अधिकारी के ऊपर किसी मामले को लेकर स्वयं आरोप लगे हो और वह पुलिस अधिकारी स्वयं किसी पत्रकार को नोटिस भेजता है तो क्या यह कानून का उल्लंघन नहीं.? अगर है तो ऐसे पुलिस अधिकारियों के ऊपर उच्च अधिकारियों के द्वारा कठोर दंडात्मक कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता है वहीं दूसरी ओर किसी असामाजिक तत्व के द्वारा सामूहिक अन्यथा व्यक्तिगत तौर पर किसी सार्वजनिक सड़कों, संस्थाओं अन्यथा किसी भी जगह पर सार्वजनिक रूप से धारदार हथियारों से कथित पत्रकार से मारपीट की जाती अन्यथा जा रही है, और वह लहूलुहान पीड़ित पत्रकार किसी थाने में एफआईआर दर्ज करवाने जाता है तो उसका एफआईआर दर्ज और मुलायजा करवाने के बजाय, उसे आरोपी की तरह घंटों थाने में बैठाकर कड़ी पूछताछ की जाती है। उसे यह एहसास दिलाया जाता है कि सच का खबर प्रकाशन करना तुम्हारे लिए जुर्म है तो ऐसे भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करते हुए छत्तीसगढ़ शासन प्रशासन को कठोर एवं दंडात्मक कार्रवाई करने की जरूरत है।



पत्रकारिता किसी के बाप की बपौती नहीं, भारत का कानून सबके लिए एक बराबर–


सबसे पहले अपने बीच बचाव के लिए ख़बर  प्रकाशन करने के संबंध में पत्रकारों को सत्यापित दस्तावेज के आधार पर साक्ष्य सबूत, और अच्छे अखलाक की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। फिर चाहे वो पत्रकार हो, पुलिस हो, आम नागरिक हो अन्यथा समाज सेवक व जन प्रतिनिधि, अन्य, कानून सबके लिए एक बराबर है। ऐसा नहीं की कुछ पुलिस वर्दी की आड़ लेकर जो चाहे वह करती रहे और पत्रकार खबर प्रकाशन ना करें, हाथ पर हाथ धरे रहे। आप निष्ठा पूर्वक और ईमानदारी से अच्छे कार्य करें आप लोगों की भी खबर प्रकाशन अच्छा और सम्मान पूर्वक किया जाएगा।  आपका सहयोग निरंतर किया जा रहा है और आगे भी समाज में हो रहे सच्ची घटनाओं पर आधारित सत्य और सटीक खबरों का प्रकाशन लगातार हमारे द्वारा किया जाता रहेगा। 

एक निर्भीक, निर्भय, निष्पक्ष, बेबाक पत्रकार✍️

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