श्रम सेवा भूविस्थापित कामगार संगठन (CKS ) के 5धुरंधर सेनानियों को मिली जमानत, कुसमुंडा नीलकंठ कंपनी रिश्वत लेने व बाहरी लोगों को काम पर लगाने का है गंभीर आरोप.

श्रम सेवा भूविस्थापित कामगार संगठन (CKS ) के 5धुरंधर सेनानियों को मिली जमानत, कुसमुंडा नीलकंठ कंपनी रिश्वत लेने व बाहरी लोगों को काम पर लगाने का है गंभीर आरोप.



जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो छ.ग.


कोरबा(सुघर गांव)। कोरबा जिला प्रशासन, शासन के दिग्गज नेताओं, अन्य को सूचना देने बावजूद एसईसीएल कुसमुंडा कोयला खुली खदान में कार्यरत नीलकंठ विवादित कंपनी के एच आर. मुकेश सिंह के दोगले रवैये नाराज चल रहे श्रम सेवा भूविस्थापित कामगार संगठन के कार्यकर्ताओं ने पूर्व में नीलकंठ कंपनी वर्कशॉप पर ताला जड़ दिया और उग्र आंदोलन किया गया। कुसमुंडा पुलिस प्रशासन का कहना है कि आंदोलन के समर्थकों ने कुसमुंडा नीलकंठ में कार्यरत बाहरी कर्मियों के ऊपर मारपीट किया, जबकि सच्चाई कुछ और ही बयान कर रही। आंदोलन के दौरान जिन व्यक्तियों ने मारपीट नहीं की उन लोगों के ऊपर पुलिस ने BNS की फर्जी धारा लगाकर रिमांड पर भिजवाया गया। कैमरे में कैद लोगों की पुष्टि की गई तो जो लोग मारपीट नहीं किए है उन्हें जबरदस्ती जेल जाना पड़ा। पुलिस ने उन लोगों के ऊपर आंदोलन की अगुवाई करने का आरोप लगाया गया।

छत्तीसगढ़ शासन,जिला प्रशासन व एसईसीएल ये सभी सूचना मामले से ग्रसित होकर हो गए हैं– पोलियो ग्रस्त.


छत्तीसगढ़ राज्य के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन कोरबा जिले में निवासरत है। आंदोलन की सूचना तो श्रम मंत्री को भी प्राप्त हुई थी परंतु उनके द्वारा भी चुप्पी साधी गई, इसी प्रकार जिले के कलेक्टर और एसपी तथा कुसमुंडा थाने और कुसमुंडा एसईसीएल में भी आंदोलन करने की सूचना दी गई थी। परंतु सूचना देने बावजूद आंदोलन के दिन धरातल पर एक भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं दिखे। इससे क्या प्रतीत होता है और इस मामले पर क्या निष्कर्ष निकालता है.?



आंदोलन होने से यह प्रतीत हुआ कि मजदूरों से संबंधित मामले को लेकर कोरबा जिला प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यकाल शून्य है। निष्कर्ष है कि गरीब मजदूरों की बात जब सीधी तरीके से शासन, प्रशासन को समझ नहीं आई तो कूट रचनाकर कुछ झोला झंडा उठाने वाली संगठन और दलाली कर रहे कुछ पुलिस अधिकारियों के मिली भगत से ठेका मजदूरों और कमजोर वर्ग के लोगों के ऊपर फर्जी FIR कर जेल भेजवाने का काम किया गया। गरीबों को न्याय मिलना तो दूर उनकी बात तक नहीं सुनी गई। जब सत्ता और सत्ता के रक्षक ही भक्षक बन जाए तो मजदूरों का पतन होना निश्चित हो जाता है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ शासन, कोरबा प्रशासन और एसईसीएल कुसमुंडा अधिकारियों के मिली भगत से मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। जिसकी जमीन जा रही है वह रोजगार के लिए दर–दर भटक रहा और जो इस प्रांत का है ही नहीं उससे लाखों रुपयों का रिश्वत लेकर काम पर लगाया जा रहा है। गजब का तालमेल है। 

श्रम सेवा भूमि स्थापित कामगार संगठन(CKS) के नेतृत्व में चेतावनी भरा संदेश–


छत्तीसगढ़ शासन, कोरबा जिलाप्रशासन और कुसमुंडा एसईसीएल को साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि नीलकंठ कंपनी में बाहरी लोगों को भर्ती किया गया है और उनसे काम करवाई जा रही जो की कतई बर्दाश्त नहीं होगी। एसईसीएल हमारे जल, जंगल, जमीन पर कब्जा कर रखा है। हमारी जमीनें गई है तो रोजगार से संबंधित पहला प्राथमिकता हमारा ही होगा। और अगर शासन, प्रशासन तथा एसईसीएल यह बात मानने से इंकार करती है तो एक बार तो क्या हजार बार जेल जाएंगे मगर अपना हक, अधिकार की लड़ाई की जंग यूं ही जारी रहेगी। सुधर जाओ वरना हम सुधार देंगे।




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