आज न खेत बिके, न किसी के सामने हाथ फैला,हर बेटी सिर ऊँचा कर ससुराल गई
राकेश पटेल (भाजयुमो )
सारंगढ़-बिलाईगढ़ ( सुघर गांव)
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के मुख्यालय सारंगढ़ की कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह समारोह केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के गरीब और वंचित परिवारों के लिए सम्मान, आत्मनिर्भरता और विश्वास का उत्सव था। सैकड़ों बेटियों की विदाई उन आँसुओं के साथ हुई, जो दर्द के नहीं बल्कि वर्षों की चिंता से मुक्ति और भविष्य के भरोसे के थे।
गरीब परिवारों के लिए बेटी की शादी लंबे समय तक चिंता और कर्ज का पर्याय रही है। खेत-खलिहान बिकते थे, साहूकारों के सामने सिर झुकता था और माता-पिता जीवन भर के बोझ तले दब जाते थे। ऐसे समय में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने उस व्यवस्था को बदला, जहाँ विवाह बोझ नहीं, बल्कि सम्मान बन गया।
छत्तीसगढ़ की पहचान कभी ‘बीमारू राज्य’ के रूप में की जाती थी, लेकिन डॉ. रमन सिंह जी की दूरदर्शी सोच ने इस धारणा को बदला। अंत्योदय से लेकर कन्यादान योजना तक, जनकल्याण की नींव मजबूत की गई। कन्यादान योजना—जो आज कन्या विवाह योजना के रूप में आगे बढ़ रही है—ने लाखों गरीब परिवारों को राहत दी और बेटियों को आत्मसम्मान के साथ जीवन की नई शुरुआत का अवसर दिया।
आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में यह योजना और अधिक सशक्त हुई है। सहायता राशि में वृद्धि, प्रशासनिक पारदर्शिता और संवेदनशील क्रियान्वयन ने यह सिद्ध कर दिया है कि सरकार सिर्फ योजनाएँ नहीं बनाती, बल्कि गरीब के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाती है।
इस सामूहिक विवाह में शामिल माता-पिता के चेहरे पर जो संतोष और गर्व दिखा, वही इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है। यह केवल विवाह नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, आर्थिक सहयोग और बेटी के सम्मान की जीत है।
यही भारतीय जनता पार्टी की राजनीति का मूल मंत्र है—
गरीब के घर मुस्कान, बेटी के जीवन में सुरक्षा और समाज में समरसता।
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