कोरबा में राशन व्यवस्था बेपटरी,100 से ज्यादा दुकानों में चावल नदारद,हजारों परिवारों के सामने गहराया भोजन संकट

कोरबा में राशन व्यवस्था बेपटरी,100 से ज्यादा दुकानों में चावल नदारद,हजारों परिवारों के सामने गहराया भोजन संकट
        विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 22 फरवरी 2026, जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) इस माह गंभीर अव्यवस्था का शिकार हो गई है। फरवरी का चावल 20 दिन बीत जाने के बाद भी 100 से अधिक उचित मूल्य की दुकानों तक नहीं पहुंच पाया है। नतीजतन हजारों राशनकार्डधारी रोजाना दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं और उनकी रसोई पर सीधा असर पड़ रहा है।
           रोज लौट रहे लोग खाली हाथ 
ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों से शिकायतें मिल रही हैं कि दुकानों में चावल उपलब्ध नहीं है। कई जगह दुकानें खुली तो हैं, लेकिन स्टॉक न होने से हितग्राहियों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। गरीब परिवारों के लिए यही राशन महीनेभर के भोजन का मुख्य आधार होता है।
         3.57 लाख हितग्राही प्रभावित
जिले की 553 राशन दुकानों के जरिए करीब 3 लाख 57 हजार राशनकार्डधारियों को हर माह चावल, चना, शक्कर और नमक वितरित किया जाता है। 100 से अधिक दुकानों में अब तक चावल नहीं पहुंचा। कई दुकानों में आधे से भी कम लोगों को वितरण हो सका। ग्रामीण अंचलों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।
        टेंडर में देरी से टूटी आपूर्ति श्रृंखला 
फोर्टिफाइड चावल के टेंडर समय पर नहीं होने के कारण मिलरों ने नान (NAN) के गोदामों में समय पर चावल जमा नहीं किया। गोदामों में देरी का सीधा असर दुकानों तक आपूर्ति पर पड़ा और पूरा वितरण तंत्र प्रभावित हो गया।
        1.20 लाख क्विंटल की मासिक जरूरत
 कोरबा जिले में हर महीने करीब 1 लाख 20 हजार क्विंटल चावल की आवश्यकता होती है। इस बार आधे से भी कम मात्रा में भंडारण हो पाया,जिससे नियमित सप्लाई बाधित रही।
            लैप्स का खतरा,बढ़ी चिंता
नियमों के अनुसार महीने के भीतर राशन उठाना जरूरी है, अन्यथा वह लैप्स हो जाता है। देरी के चलते हितग्राहियों में यह डर बना हुआ है कि कहीं उनका अधिकार अधूरा न रह जाए।
         विभाग का आश्वासन 
खाद्य विभाग का दावा है कि दो दिन के भीतर सभी दुकानों में चावल पहुंचा दिया जाएगा और किसी का राशन लैप्स नहीं होने दिया जाएगा। वितरण की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। “02 दिन के भीतर सभी उचित मूल्य दुकानों में चावल उपलब्ध करा दिया जाएगा।” — जी.एस. कंवर, खाद्य अधिकारी
                      निष्कर्ष 
राशन जैसी मूलभूत व्यवस्था में देरी सीधे गरीब परिवारों की थाली पर असर डालती है। अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है—आपूर्ति बहाल कर जनता का भरोसा कायम रखना।

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