धतुरा में ₹5.08 लाख का मनरेगा घोटाला, कार्रवाई शून्य - किसका संरक्षण? शिकायतें बेअसर, न्याय को तरसते मजदूर - प्रशासन पर सवाल”

धतुरा में ₹5.08 लाख का मनरेगा घोटाला, कार्रवाई शून्य - किसका संरक्षण? शिकायतें बेअसर, न्याय को तरसते मजदूर - प्रशासन पर सवाल”
    विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 29 जनवरी 2026, जिले अंतर्गत विकासखंड पाली के ग्राम पंचायत धतुरा में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी राशि में कथित गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल तैयार कर ₹5,08,742 की राशि निकालने का आरोप मेट एवं वार्ड क्रमांक 06 के पंच अमरनाथ कौशिक पर लगा है। हैरानी की बात यह है कि कई बार शिकायत और जनप्रतिनिधियों को सूचना देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
     फर्जी हाजिरी से निकाली गई मजदूरी
बताया जा रहा है कि जिन व्यक्तियों ने कार्य ही नहीं किया, उनके नाम से उपस्थिति दर्ज कर भुगतान निकाल लिया गया। मजदूरों का आरोप है कि बिना जानकारी और अनुमति के उनकी मजदूरी हड़प ली गई।
       हितग्राहियों की रकम पर डाका
 देव कुमार कौशिक से ₹9,500, रूप कुमारी से ₹35,000, ज्ञानेन्द्र से ₹9,010, विष्णु से ₹11,000 सहित कई अन्य मजदूरों की राशि भी इस घोटाले में शामिल बताई जा रही है।
 अधिकारियों पर भी लगे आरोप,फिर हुआ खंडन जनपद पंचायत पाली के सीईओ के सामने आरोपी द्वारा ₹11,000 देने की बात कहे जाने से मामला और गरमा गया, हालांकि सीईओ ने इसे पूरी तरह निराधार बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया।
       सरपंच - सचिव ने झाड़ा पल्ला 
सरपंच और सचिव ने लिखित बयान में स्पष्ट किया कि फर्जी मस्टर रोल से उनका कोई संबंध नहीं है और यह पूरा कृत्य मेट एवं पंच द्वारा किया गया है।
      04 बार जनदर्शन,फिर भी नहीं सुनवाई 
15 सितंबर, 29 सितंबर, 15 दिसंबर 2025 और 5 जनवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दी गई,लेकिन हितग्राहियों का आरोप है कि आज तक न जांच पूरी हुई और न ही राशि वापस दिलाने की पहल हुई।
 विधायक को सूचना,निर्देश भी,फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
 निराश होकर 37 हितग्राही कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल के निवास पहुंचे। विधायक ने तत्काल जनपद सीईओ और कार्यक्रम अधिकारी को फोन कर राशि वापसी व सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक धरातल पर कोई कड़ी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है,जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर देरी का कारण क्या है और आरोपी को किसका संरक्षण मिल रहा है?
      राजनीतिक पद ने बढ़ाई संवेदनशीलता
 गौरतलब है कि आरोपी अमरनाथ कौशिक एक राजनीतिक दल में महामंत्री और वर्तमान पंचायत पंच भी है। ऐसे में मामला प्रशासनिक ही नहीं, राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है।
       मजदूरों में आक्रोश,जांच की मांग तेज
 पीड़ित मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और राशि वापसी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह पारदर्शिता दिखाते हुए कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाता है। अब तक किसी भी हितग्राही को राशि नहीं मिली - मजदूरों में निराशा और आक्रोश, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल।

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