बड़ी खबर:– अमित बघेल ने देवेंद्र नगर थाने में खुद को किया सरेंडर, मां की निधन पर अंतिम संस्कार के लिए मांगेंगे जमानत..
जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो प्रमुख छग.
रायपुर(सुघर गांव)। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने रायपुर देवेंद्र नगर थाने में खुद को सरेंडर करने जा रहे थे तभी 10 मिनट पहले बघेल को पुलिस ने खुद का नाम कमाने के लिए पहले ही गिरफ्तार कर लिया। जबकि आज दिनांक को बघेल खुद को सरेंडर करने की बात सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर सार्वजनिक रूप से कही गई थी। वें 26 दिनों से फरार थे और उनके खिलाफ 12 राज्यों में एफआईआर दर्ज हुई है। अमित बघेल पर आपत्तिजनक बयानों और हेट स्पीच के आरोप हैं। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। अमित बघेल की सजा के रूप में उन्हें कई राज्यों में ले जाने की योजना है, जिससे उन्हें पूरे देश की सैर करने का मौका मिलेगा। अमित बघेल की गिरफ्तारी के बाद उनके हजारों समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हुई।
बता दे कि जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने देवेंद्र नगर थाने में खुद की गिरफ्तारी दी है। इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट 26 नवंबर 2025 को बघेल मामले पर कड़ी फटकार लगाते हुए सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि जुबान पर अपना लगाम रखें। जहां-जहां एफआईआर दर्ज है, वहां की कानूनी प्रक्रिया का सामना करने की बात कहते हुए संप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने साफ इनकार किया था कि कोई राहत नहीं दी जाएगी और कानून अपना काम करेगी।
छत्तीसगढ़ माटी के सपूत एक क्रांतिकारी पत्रकार का तेज तर्रार लेख–
छत्तीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढ़ियों के ऊपर हो रहे लगातार शोषण और अत्याचार। पिछले 22 वर्षों में क्राइम की घटना छत्तीसगढ़ राज्य में लगातार बढ़ती जा रही है अन्य प्रांत के लोग यहां आकर छत्तीसगढ़िया आदिवासियों की जमीनों को कब्जा करते हुए लगातार बसते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के मातृभूमि में रहकर छत्तीसगढ़ महतारी की बोली,भाषा, कल्चर, संस्कृति, रिति रिवाज को अनदेखा कर बाहरी व्यक्ति खुद को छत्तीसगढ़िया कहते हैं। जिस भी दिवस में छत्तीसगढ़ियों और आदिवासियों के साथ मारपीट शोषण अत्याचार तथा छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ी गई। चाहे वह किसी भी संबंधित मामले से संबंधित हो। छत्तीसगढ़िया समाज को छोड़कर किसी भी समाज ने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को खंडन करने वाले के विरोध में आवाज उठाते सड़कों पर नहीं देखी गई। सिवाय छत्तीसगढ़िया समाज, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के। इस मामले पर भाजपा सरकार भी चुप्पी साधी रही वहीं विपक्ष पार्टी मौन। शासन और कानून के रक्षक ही जब भक्षक बन जाए तो लोकतंत्र का अस्तित्व ही खत्म।
क्या है मामला और बघेल ने खुद को क्यों किया सरेंडर–
यह पूरा मामला दिनांक 27 अक्टूबर का है उक्त दिनांक को छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति की मूर्ति को तोड़ने की घटना के बाद उत्पन्न हुआ था। परंतु आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य प्रांत के किसी विशेष समाज के लोगों द्वारा छत्तीसगढ़िया समाज को गाली गलौज देने के संबंध में पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। जिस संबंध में छत्तीसगढ़िया क्रान्तिसेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने सिंधी और अग्रसेन महाराज समाज के इष्ट देवता पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस मामले पर अग्रवाल और सिंधी समाज ने छत्तीसगढ़ प्रदेश तथा अन्य प्रदेशों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था। जिस कारण बगल के विरुद्ध अनेकों राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई थी। बघेल के सरेंडर किए जाने पर कोर्ट परिसर और थाने के आसपास कड़ी सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात की गई है।
मां का निधन–
अमित बघेल के द्वारा सरेंडर की प्रक्रिया से पहले ही आज शुक्रवार की सुबह अमित बघेल की मां का निधन हो गया है। उनके शव को रायपुर के धरसींवा ब्लॉक के उनके पैतृक गांव पथरी ले जाया गया है, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा। बघेल अधिवक्ता के माध्यम से अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बेल के लिए अप्लाई कर सकते हैं। लोकतांत्रिक भारत देश में भेदभाव के कारण लोकतंत्र की हत्या लगातार होती रही है।

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