मुंगेली जिला के केंद्रीय मंत्री तथा डिप्टी सीएम छत्तीसगढ़ होने के बाद मुंगेली राष्ट्रीय मार्ग 130 की स्थिति पर उठ रही सवाल...

मुंगेली - मुंगेली जिला मुख्यालय में स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-130 की खस्ताहाल स्थिति ने आम नागरिकों का जीवन त्रस्त कर दिया है। मुंगेली से पंडरिया- कवर्धा को जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण सड़क लंबे समय से जर्जर है, जिस पर बड़े-बड़े गड्ढे लोगों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सड़क की दुर्दशा इस कदर बढ़ चुकी है कि बरसात की तरह नाली का पानी सड़क पर जमा रहता है, जिससे आवागमन लगातार कठिन और जोखिम भरा बना हुआ है।

मुंगेली विधानसभा के क्षेत्रवासियों की तैयारी :-

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सड़क बरसात के मौसम के पहले ही खराब हो चुकी थी, लेकिन बावजूद इसके अब तक कोई स्थाई मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ। जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों तक, किसी ने भी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया है। नगरवासियों और राहगीरों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश खुले रूप में सामने आने लगा है।

दुर्घटनाओं का बढ़ा खतरा, रोजाना घायल हो रहे लोग जर्जर सड़क में जगह-जगह बने गड्ढों के कारण वाहन चालक आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। कई दुपहिया सवार सड़क की असमान सतह और भरे पानी के कारण फिसलकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। आम नागरिकों का कहना है कि वे मजबूरी में इसी सड़क से गुजरते हैं और हर सफर जोखिम के साथ करना पड़ रहा है।

शासन के घोषणाओं की छलावा कुछ इस प्रकार :-

शहर विकास की तुलना में उपेक्षित सड़क व्यवस्था एक ओर शासन गांव-गांव तक पक्की सड़कों और नाली निर्माण का जाल बिछाने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर शहर की मुख्य सड़कों की बदहाली इन दावों पर सवाल खड़ा करती है। नगर में नाली निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन उसी नाली से बहकर सड़क पर जमा होने वाला पानी अब समस्या को और बढ़ा रहा है। शहरवासियों का कहना है कि विकास के नाम पर बजट खर्च तो हो रहा है, पर उसका वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा।

जनता की मांग :-

जल्द से जल्द समाधान हो स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि एनएच-130 के मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य को तत्काल प्राथमिकता में लें। साथ ही, सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर स्थायी समाधान प्रस्तुत किया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लगे और लोगों को राहत मिल सके। मरम्मत या पुनर्निर्माण कार्य अगर तत्काल नहीं होने पर स्थानीय वह ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के द्वारा बड़ी जनसंख्या में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होने की बात कही जा रही है, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी अब देखना यहां होगा क्या शासन प्रशासन इसको नजरअंदाज करती है या रोड का मरम्मत या पुनर्निर्माण करने में अपना योगदान देती है।

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