दीपका मेगा प्रोजेक्ट विस्तार कोरबा को आपदा की ओर धकेलने की तैयारी,40 MTPA से 55 MTPA विस्तार पर गहरी आपत्ति
विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 16 दिसंबर 2025, जिले के एसईसीएल (South Eastern Coalfields Limited) की दीपका ओपन कास्ट कोयला खदान के प्रस्तावित विस्तार को लेकर क्षेत्र के नागरिकों, किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है। वर्तमान में 40 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) उत्पादन से ही क्षेत्र गंभीर संकट झेल रहा है। ऐसे में इसे बढ़ाकर 55 MTPA करना कोरबा के लिए विनाशकारी साबित होगा। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) की एक टीम कल खदान का निरीक्षण करने आ रही है,जिसका उद्देश्य इस विनाशकारी विस्तार को मंजूरी देना बताया जा रहा है। हम MoEF&CC की टीम से अपील करते हैं कि वे केवल फाइलों और रिपोर्टों तक सीमित न रहें,बल्कि ज़मीनी हकीकत, पीड़ित लोगों की आवाज़ और पर्यावरणीय तबाही के स्पष्ट संकेतों को गंभीरता से देखें।
मौजूदा खनन से ही क्षेत्र बदहाली की कगार पर वायु व ध्वनि प्रदूषण
कोयले की धूल और फ्लाई ऐश पूरे क्षेत्र में ज़हरीली परत बन चुकी है, दमा, टीबी, आंखों और त्वचा की बीमारियों में बेतहाशा वृद्धि, भारी ब्लास्टिंग से घरों में दरारें, लगातार कंपन से मानसिक भय, वन्यजीवों का पलायन और प्राकृतिक संतुलन नष्ट।
जल संकट और जहरीला पानी
अत्यधिक खनन से भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे गिरा, दर्जनों गांवों में भीषण पेयजल संकट, खदान का दूषित पानी नालों व नदियों में मिलकर, कृषि भूमि बंजर कर रहा है, जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में डाल रहा है।
जंगलों का विनाश,भविष्य का अंधकार
विस्तार के नाम पर अंधाधुंध वृक्ष कटाई, हरियाली खत्म, तापमान में बढ़ोतरी, जैव विविधता को अपूरणीय क्षति।
सामाजिक और ढांचागत तबाही
कोयला परिवहन से सड़क दुर्घटनाओं में तेज़ बढ़ोतरी, ग्रामीणों की जान हर दिन खतरे में, विस्थापितों को,न पूरा मुआवजा,न स्थायी रोजगार, न सम्मान जनक पुनर्वास।
बिना न्याय के विस्तार खुला अन्याय
जब 40 MTPA पर ही, पर्यावरण दम तोड़ रहा है,लोग बीमार हो रहे हैं, किसान उजड़ रहे हैं, तो 55 MTPA की मंजूरी सीधा-सीधा क्षेत्र को तबाही की ओर धकेलना है।
हमारी स्पष्ट और जायज़ मांगें विस्तार तत्काल रोका जाए, 55 MTPA विस्तार प्रस्ताव को तुरंत रद्द किया जाए। स्वतंत्र पर्यावरण-सामाजिक ऑडिट - मौजूदा 40 MTPA खदान का निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन हो।
जनसुनवाई को वास्तविक बनाया जाए - प्रभावित ग्राम पंचायतों की आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाए,निर्णय जनता की सहमति के बिना न हो। पुनर्वास पहले विस्तार बाद में विस्थापित परिवारों के लिए, समयबद्ध,सम्मान जनक,आजीविका-आधारित पुनर्वास पैकेज लागू हो।
कोरबा को कुर्बानी नहीं बनने देंगे
यदि यह विस्तार बिना स्थानीय सहमति,बिना पर्यावरणीय संतुलन और बिना सामाजिक न्याय के आगे बढ़ाया गया, तो यह कोरबा को पर्यावरणीय और मानवीय आपदा में बदल देगा। हम स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि* अपने जल, जंगल, ज़मीन और भविष्य की रक्षा के लिए हम सभी लोकतांत्रिक और कानूनी विकल्प अपनाने को मजबूर होंगे।
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