भूमाफियाओं ने एडवोकेट दिलीप मिरी के ऊपर कोरबा कोतवाली में कराई फर्जी FIR दर्ज.

भूमाफियाओं ने एडवोकेट दिलीप मिरी के ऊपर कोरबा कोतवाली में कराई फर्जी FIR दर्ज.



 जावेद अली आज़ाद, ब्यूरो प्रमुख छत्तीसगढ़ 


कोरबा (सुघर गांव)। कोरबा जिले के पुरानी बस्ती में निवासरत कुछ आसामाजिक तत्व के व्यक्ति ने एक पेशेवर वकील और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष के ऊपर डराने धमकाने, झूठ जातिगत मामले में फंसाने तथा रुपए पैसों की अवैध उगाही का आरोप लगाते हुए उक्त व्यक्ति ने कोरबा कोतवाली में फर्जी एफआईआर दर्ज करवाई गई है।


बता दें कि छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेशाध्यक्ष व पेशे से अधिवक्ता दिलीप कुमार मिरी ने जिला एवं सत्र न्यायालय कोरबा में अपनी सेवा दे रहे है। और उनके निवास स्थल दादर खुर्द मानिकपुर में सहपरिवार के साथ निवास करते हैं। दिलीप मिरी ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2025 में पुरानी बस्ती में निवासरत तथाकथित भू –माफिया शत्रुघ्न सिंह राजपूत और उसके अन्य 15–20 साथियों ने मिलकर नशे की हालत में उनके निवास स्थल में घुसकर जमकर गंदी गंदी, गाली गलौज व हंगामा किए थे। इसी प्रकार दिलीप के घर के आसपास भी भय और आतंक का माहौल बनाया गया। जिससे कि दिलीप का परिवार और उसके आसपास के पड़ोसी भयभीत थे। यह मामला जब घटित हुआ। चूंकि एडवोकेट दिलीप 10 माह से अपने निवास स्थल से बाहर था। परिवार के लोग इस बीच डरे हुए थे इसलिए दिलीप को मामले की खबर नहीं बताएं परंतु आसपास के पड़ोसी ने दिलीप को इस मामले को दिनांक 30 अक्टूबर को बता दिया गया। सुरक्षा की दृष्टि से दिलीप ने अपने घर में CCTV कैमरा लगवाया है, और आरोप लगाया है कि आज भी शत्रुधन राजपूत एवं उनके अन्य साथी आते है और भय और आतंक का माहौल बनाते है,जबकि यहाँ इसका जमीन और मकान भी नहीं है,मेरे घर में मेरी माँ,पिता जी,मेरी पत्नी एवं छोटे बच्चे रहते है,जिनके ऊपर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जानबूझकर माहौल खराब किया जा रहा है।


दूसरी ओर फर्जी आरोप के दावेदार भूमाफिया ने कहा–


वहीं भूमाफिया शत्रुघ्न सिंह राजपूत, पुरानी बस्ती निवासी ने अपने लिखित शिकायत में अपनी पुस्तैनी भुमि जो ग्राम दादर खुर्द, डिपरापारा जिला कोरबा में स्थित है। जिसने संबंधित कार्य कराने के नाम पर दिलीप मिरी निवासी मानिकपुर के द्वारा फर्जी दावेदार ने आर्थिक धोखाधड़ी एवं अवैध उगाई की बात कही है। शत्रुघ्न ने कहा, मेरी भूमि पर राजस्व नक्शा नामांकन लिए दिलीप द्वारा मुझे दिनांक 18.10.2025 को ₹100000 व 23.10.2025 को 70000 रुपए एवं 25.10.2025 को ₹50000 रुपए कुल 220000 (दो लाख बीस हजार रुपए की उगाई की गई। इसके अतिरिक्त उसने प्रति डिसमिल 20000 (बीस हजार रुपये भूमि प्राप्त होने के खरीदी-बिक्री होने के बाद और भुगतान करने दबाव कर रहा है। मेरे द्वारा मना करने पर मुझे झूठे जातिगत मामले में फंसाने की साजिश दिलीप द्वारा किया जा रहा है। मामले में कितनी सच्चाई है जिला सत्र न्यायालय कोरबा में जाने के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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