मितानिनों की हुंकार: संविलियन व वेतन वृद्धि की मांग पर उग्र आंदोलन, पुलिस की सख्ती से बढ़ा तनाव।


विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ

कोरबा ( सुघर गांव )। जिले अंतर्गत प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ ने एक बार फिर अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ का आरोप है कि 2023 के चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फेसिलिटेटर और ब्लॉक समन्वयकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में संविलियन करने और क्षतिपूर्ति वेतन में 50 प्रतिशत वृद्धि का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे अमल में नहीं लाया गया। इसी के विरोध में संघ ने 7 अगस्त से कामबंद–कलमबंद अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। 19 अगस्त को प्रदेशभर में जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपने के बाद आंदोलनकारियों ने 4 सितम्बर को मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री निवास घेराव का एलान किया।
प्रशासन ने बरती सख्ती :- घेराव की घोषणा के बाद सरकार ने आंदोलन को रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाया। पुलिस बल की तैनाती कर राजधानी पहुँचने वाली मितानिनों को थानों, रास्तों, टोल नाकों और रेलवे स्टेशनों पर रोक दिया गया। बावजूद इसके, आंदोलनकारियों ने जहाँ-जहाँ रोका गया, वहीं धरना-प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की।
 ठेका प्रथा का विरोध :- मितानिन संघ का कहना है कि वे वर्षों से जनता की निःस्वार्थ सेवा कर रही हैं, लेकिन सरकार लगातार उनके हक और सम्मान की अनदेखी कर रही है। संगठन ने स्पष्ट किया कि ठेका प्रथा खत्म करने और सभी मितानिनों को नियमित करने की मांग भी उनकी प्राथमिकता में शामिल है।आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार वादों को पूरा नहीं करती, तब तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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