ग्राम धनराज के ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर NTPC के आला–अफसरों पर फेंका राख,
क्रोधित ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए प्लांट प्रबंधन ने प्रदूषण समस्या को दूर करने का दिया आश्वासन..
जावेद अली आज़ादकोरबा (सुघर गांव)। 07 जून 2025,
ऊर्जाधानी कोरबा में बड़ी संख्या में फैक्ट्री और कारखाने संचालित हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन करने वाला जिला कोरबा ही है। कोरबा में एनटीपीसी का पावर प्लांट संचालित है। पावर प्लांट से जहां बिजली का भरपूर उत्पादन होता है वहीं दूसरी ओर प्लांट से निकलने वाले रासायनिक राख से प्रदूषण भी फैलता है। समूचे जिले से लेकर प्रभावित क्षेत्रों में हानिकारक जहरीले राख का मार जिलेवासी झेल रहे हैं। और सबसे ज्यादा प्रदूषण की समस्या रखड़ाम किए जाने वाले प्रभावित क्षेत्र के स्थाई निवासी राख समस्या से जूझ रहे हैं। और समय-समय पर स्थाई निवासी प्रदूषण समस्या को लेकर आवाज भी उठाते रहे हैं। शुक्रवार को इसी कड़ी में धनरास गांव के लोगों ने जोरदार धरना प्रदर्शन किया। धनराज गांव वालों ने एनटीपीसी अफसरों पर रासायनिक राख फेंककर बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ विरोध जताया। बाद में प्लांट प्रबंधन की ओर से आए अफसरों ने गांव वालों को आश्वासन दिया कि जल्द ही प्रदूषण और राख की समस्या का समाधान किया जाएगा।
NTPC के आला अफसरों पर फेंका राख
दरअसल धनरास गांव के पास ही एनटीपीसी का पावर प्लांट स्थित है। प्लांट से बड़ी मात्रा में रासायनिक राखड़ उड़कर लोगों के घरों और खेतों में पहुंचता है। जिसका सीधा असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रही है लोग़ तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं।इसी कड़ी में परेशान गांव वाले अपनी समस्या को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
इस मामले पर जब कंपनी के अफसर ग्रामीणों समझाने पहुंचे तो ग्रामीणों ने एनटीपीसी अफसरों पर राख फेंका और राखड़ से हो रहे प्रदूषण पर विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि पावर प्लांट प्रबंधन द्वारा राखड़ डैम का उचित प्रबंधन नहीं किया जाता। गर्मी के मौसम में राख उड़कर सीधे उनके गांव में आ रही है। जिससे वह बेहद परेशान है। इस घटना के पूर्व भी ग्रामीणों के साथ अधिकारियों ने बैठक की थी और जल्द से जल्द समस्या के निराकरण का आश्वासन भी दिया था।
धनरास में लगातार ग्रामीण कर रहे प्रदर्शनजिले के उप नगरीय क्षेत्र छूरी के समीप गांव धनरास स्थित है। यहां एनटीपीसी कोरबा का राखड़ डैम स्थापित है। ग्रामीणों का आरोप है कि पावर प्लांट प्रबंधन ने उनकी उपजाऊ जमीनों का अधिग्रहण किया। यह राख डैम बना दिया, लेकिन अपने वादों को पूरा नहीं किया। जिसके कारण न सिर्फ गांव धनरास बल्कि आसपास के गांव पुरैनाखार, झोरा, छूरी, घोरापाठ, घमोटा और लोतलोता में ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। खास तौर पर गर्मी के मौसम में तेज हवा के साथ राख दूर-दूर तक फैल जाती है। खेतों की फसल प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों की सेहत खराब हो रही है। यदि घर के आंगन में बर्तन या खाना रख दिया जाए, तब राख इतनी गिरती है कि वह भी पूरी तरह से खाने योग्य नहीं रहता। अनेकों कृषि योग्य भूमि भी दलदली क्षेत्र में तब्दील हो गई है।
2024 में एनटीपीसी और ग्रामीणों के बीच हुआ था समझौताधनरास गांव के ग्रामीण इस तरह का आंदोलन कई बार कर चुके हैं। पिछली बार अक्टूबर 2024 में भी वह प्रदूषण और राख के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। तब प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में प्रभावितों से एक समझौता किया गया था। रोजगार, मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, राख की समस्या का समाधान करना और अन्य मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों की मानें तो इन मांगों में से एक भी वादा अब तक एनटीपीसी प्रबंधन ने पूरा नहीं किया है।
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