करोड़ों खर्च,फिर भी बूंद - बूंद को तरसे ग्रामीण: जल जीवन मिशन जिले में दम तोड़ता आ रहा नजर

करोड़ों खर्च,फिर भी बूंद - बूंद को तरसे ग्रामीण: जल जीवन मिशन जिले में दम तोड़ता आ रहा नजर
   आधे - अधूरे नल: टंकी बनी, टोटी लगी,लेकिन नल सूखा पड़ा है - जल जीवन मिशन की हकीकत बयां करती तस्वीर
     मुंगेली (सुघर गांव)। 15 जून 2025,
केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन जिले में भ्रष्टाचार,लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जिले के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के लोग आज भी साफ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। योजना के अंतर्गत बनाए गए जल टंकियाँ, पाइप लाइन,मोटर पंप या तो अधूरी पड़ी हैं या शोपीस बन चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना से हर घर तक पानी पहुंचाने का सपना अब केवल कागजों में सिमट कर रह गया है। कई गांवों में टंकियाँ बन गई हैं,पर पाइप लाइन अब तक नहीं बिछी,कहीं पाइप लाइन बिछ गई तो मोटर नहीं लगी, और जहां सब कुछ बन चुका है वहां भी पानी की सप्लाई नहीं हो रही। हालत यह है कि गांवों के घरों में टोटियां तो लगा दी गई हैं, लेकिन उनमें पानी की एक बूंद नहीं आती।
    सेमरकोना से सेतगंगा तक अधूरे प्रोजेक्ट
सेतगंगा,फास्टरपुर,सिल्ली, नागोपहरी,विचारपुर,जल्ली, तरवरपुर,सिपाही,तालम, बीजातराई, पंडोतरा,जैसे 40 से अधिक ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के कार्य अधूरे पड़े हैं। इन गांवों के ग्रामीण हीरा सिंह कश्यप (सेमरकोना),अनिष सेमुअल मसीह (फास्टरपुर), संतोष देवांगन,किशन कन्हैया, नमक लाल भास्कर (तरवरपुर) जैसे दर्जनों लोगों ने बताया कि वर्षों से काम चल रहा है,पर आज तक पानी की सुविधा नहीं मिली है।
 सेतगंगा में अधूरी पाइप लाइन, ब्राम्हण पारा वासी परेशान
ग्राम पंचायत सेतगंगा के ब्राम्हण पारा के ग्रामीणों ने बताया कि पाइपलाइन आज तक नहीं बिछाई गई है,जिससे पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार जन प्रतिनिधियों और सरपंचों से शिकायत की,लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वे अब भी पुराने कुएं और तालाबों के भरोसे ही हैं।
करही गांव की दुर्दशा पर भीम रेजिमेंट ने सौंपा ज्ञापन
भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ के जिला युवा प्रभारी करन आदिले ने जिले कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर ग्राम करही की गंभीर पेयजल समस्या और अधूरी प्रधानमंत्री आवास योजना की तरफ ध्यान आकर्षित किया है। ज्ञापन में बताया गया कि गर्मियों में हैंडपंप सूख जाते हैं, पाइप लाइन अधूरी है और लोगों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं हो रहा। वहीं आवास योजना के अंतर्गत कई लाभार्थियों को आवास की मंजूरी के बावजूद अभी तक घर नहीं मिला है।
  जल संकट से उबरने की कोई ठोस पहल नहीं
गंभीर बात यह है कि जिला मुख्यालय से कुछ किलोमीटर की दूरी पर बसे गांवों में भी पेयजल संकट बना हुआ है,जिससे यह स्पष्ट होता है कि जिले में जल जीवन मिशन की निगरानी और क्रियान्वयन में भारी खामियां हैं। ग्रामीणों की बार - बार की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग और अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।       
             करन आदिले की मांग
जल जीवन मिशन के कार्यों की निष्पक्ष जांच, अधूरी प्रधानमंत्री आवास योजना की उच्च स्तरीय जांच,दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
पात्र ग्रामीणों को शीघ्र आवास और पानी की सुविधा
जल जीवन मिशन का लक्ष्य था हर ग्रामीण परिवार को 2024 तक नल जल सुविधा उपलब्ध कराना, लेकिन 2025 के मध्य तक भी हालात जस के तस हैं। जिले के ग्रामीण आज भी साफ पानी के लिए त्रस्त हैं और शासन - प्रशासन की उदासीनता उनके जीवन को और कठिन बना रही है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ,तो यह योजना केवल एक असफल सरकारी अभियान बनकर रह जाएगी।

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