कोरबा जिले में पर्यावरण प्रदूषण से लोगों सांस लेना हुआ दुश्वार, अवैध तरीके से ओवरलोडेड राखड़ गाड़ियों का हो रहा परिवहन..

कोरबा जिले में पर्यावरण प्रदूषण से लोगों सांस लेना हुआ दुश्वार, अवैध तरीके से ओवरलोडेड राखड़ गाड़ियों का हो रहा परिवहन.. 
  संबंधित क्षेत्रवासी उड़ते राखड़ से है परेशान, मानिकपुर SECL महाप्रबंधक मामले पर मौन 
      प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 09 जून 2025, जिले के मानिकपुर खदान से बड़ी खबर सामने आया है,जहाँ प्रवेश द्वार गौमाता चौक के समीप सैकड़ो ओवरलोडेड राखड़ गाड़ियों की लाइन लगी रहती है। गाड़ियों में अच्छे तरीके से त्रिपाल भी नहीं लगी रहती है जिससे कि राष्ट्रीय राजमार्ग में राखड़ गाड़ियों की परिवहन होने से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अनेको पावर प्लांट से निकले रासायनिक राखड़ों का भारी वाहनों में परिवहन होने से तथा राख उड़ने से राहगीरों व आम लोगों के साथ आकस्मिक दुर्घटनाएं देखने को मिल रही है, जोकि एक मृत्यु का कारण भी है। 
     *रासायनिक रखड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक* 
बता दें कि रसायन युक्त रासायनिक राखड़ कोरबा जिले वाशियो के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। लोग तरह-तरह के बीमारियों से जूझ रहे हैं जैसे कि अस्थमा, फेफड़ों में इंफेक्शन, सांस लेने संबंधित बीमारियां, अन्य गंभीर बीमारियां जिले में बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पर्यावरण प्रदूषण से बचने को लेकर तरह-तरह की जानकारियां उपलब्ध करवाई जाती रही है, परंतु जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार की नाकाम नीतियों से वर्तमान में जिला कोरबा प्रदूषण मामले पर विश्व की 17 वे स्थान पर रिकॉर्ड बना चुकी है।
आपको बता दे,कि जिला कोरबा में तरह-तरह के पावर प्लांट एवं अन्य को कोयला खदानें भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मौजूद हैं, इन पावर प्लांट में मुख्यत: भारत अल्युमिनियम प्लांट बालको, एनटीपीसी पावर प्लांट, पावर हाउस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी पावर प्लांट, एसीबी पावर प्लांट, उरगा पावर प्लांट और जिले के छोटे-छोटे उद्योग और कारखाने पर्यावरण प्रदूषण करने का जिम्मेदार है, इसी प्रकार मानिकपुर, कुसमुंडा, दीपिका, राजगामार, सुराकछार की ओपन कास्ट माइंस और अंडरग्राउंड माइन्स कोरबा जिले के पर्यावरण को प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभा रही है।
अब बात करते हैं मानिकपुर कोयला खदान की तो दशकों से बंद पड़ी मानिकपुर की पुरानी कोयला खदान में बालको, सीपत एनटीपीसी अन्य जगहों की राखड़ डैम में एकत्रित की गई राखड़ को हैवी गाड़ियों में ओवर लोड करवा कर मानिकपुर पुरानी कोयला खदान में डंप करवाई जा रही है, राखड़ बैरियर में पर्चियां के भी हेरा फेरी हो रही है, मोदी कंस्ट्रक्शन के द्वारा अवैध तरीके ओवरलोड गाड़ियां चलाई जा रही है। जिला प्रशासन और परिवहन विभाग हाथ पैर हाथ धरे बैठी है। यह गाड़ी बालको से मानिकपुर के लिए राखड़ लेकर चलता है,जिससे आने जाने वालों के गाड़ी से सामने राखड़ से पुरा अंधेरा हो जाता है और सामने में कुछ दिखाई भी नहीं देता जिससे कभी भी दुर्घटना होने का सम्भावना बना रहता है। यह कई सालों से सीतामणी के पास स्थित बंद मानिकपुर खदान को राखड़ डंपिंग साइडिंग बना दिया गया है, जहां से सैकड़ों ट्रक रोजाना राखड़ डंप करने का काम कर रहे हैं। इससे उड़ती धूल व राखड़ से पूरे इलाके में प्रदूषण फैल गया है,और पुरा क्षेत्र धूल,राखड़ से ढक देती है।और सड़कें गड्ढों से भर हुई है हैं।
 आपको बता दे,कि यहां वाहन चालकों को वाहन चलाने में परेशानी और नागरिकों को सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत हो रही है। क्योकि सांस के साथ पुरा धूल व राखड़ शरीर के अंदर जा रहा है। आपको बता दे कुछ पत्रकारों ने SECL मानिकपुर के महाप्रबंधक कार्यालय इसके संबंध में जानकारी लेने गए हुए थे। लेकिन महाप्रबंधक के द्वारा जानकारी देना उचित नही समझा,और जानकारी नही दिया गया,इसके पीछे SECL मानिकपुर के महाप्रबंधक का मिलीभगत नजर आ रहा है। हमेशा पत्रकारों के द्वारा अपने जान को जोखिम में डालकर  छोटी बड़ी खबरे जन - जन तक पहुंचाया जाता है। आपको बता दे कि स्थानीय लोग प्रशासन की निष्क्रियता से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और यह मांग कर रहे हैं कि राखड़ डंपिंग पर नियंत्रण, सड़क की मरम्मत और पानी छिड़काव जैसी तात्कालिक व्यवस्था की जाए, ताकि प्रदूषण से राहत मिल सके।

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