प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 22 जून 2025,
जिले के पाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम हरदीबाजार में 22 जून 2025 को एसईसीएल के द्वारा नापी को लेकर तहसीलदार द्वारा विशेष बैठक रखा गया।
जिसमें ग्रामीण जन अधिक संख्या में उपस्थित हुए।आपको बता दे,कि बैठक के समय 17 सूत्रीय मांगों को लेकर बात रखा गया जिससे वहां खलभली मच गई।
जब एसईसीएल दीपका प्रबंधन और प्रशासन द्वारा आयोजित बैठक का पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एकजुट हो कर बहिष्कार कर दिया।
जानकारी के अनुसार ग्राम हरदीबाजार की परिसंपत्तियों के सर्वे और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी इस बैठक में ग्रामीणों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों की अनदेखी पर भारी विरोध जताया है। बैठक का बहिष्कार करते हुए वहां से जाने लगे। साथ ही एक कंपनी के खिलाफ पुराने मामलों और दबाव की रणनीति को लेकर भी नाराजगी बना हुआ है। एसईसीएल के द्वारा लगातार ग्रामीणों को धोखा दिया जाता रहा है। इसीलिए ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दे रहा है हमेशा से एसईसीएल इन गरीबों का शोषण करते हुए आ रहा है। इनके अधिकारों से वंचित करते हुए आ रहा है। आपको बता दे,कि एसईसीएल दीपका प्रबंधन और तहसीलदार हरदीबाजार के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम पंचायत भवन हरदीबाजार में विशेष बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में ग्राम की परिसंपत्तियों की नापी और सर्वे को लेकर चर्चा रखा गया। इस दौरान बैठक में उपस्थित एसईसीएल के अधिकारी और तहसीलदार को ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में जवाब देते हुए कहा जब तक पिछले मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा तब तक किसी भी प्रकार का सर्वे कार्य ग्रामीणों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।ग्रामीणों की प्रमुख मांग अंतर्गत 2004 में अधिग्रहण किया गया जमीनों को वर्तमान दर पर पूरा मुआवजा दिया जाए और बसाहट स्थल को सर्व सुविधायुक्त बनाया जाना चाहिए। जो बसाहट नहीं लेना चाहते उन्हें 15 लाख रूपये एकमुश्त राशि दिया जाना चाहिए और मकान के बदले 100 प्रतिशत सैल्यूसन के साथ मुआवजा दिया जाए। जिसकी आधी राशि तोड़ने से पहले दिया जाना चाहिए 2004 व 2010 के बाद खरीदी गई भूमि को पूर्ण भूमि स्वामी का दर्जा मिलना चाहिए। मकान मुआवजा में किसी भी प्रकार की कटौती न किया जाए। घटती जा रही नौकरी की संख्या की स्थिति स्पष्ट किया जाए।
ग्रामीणों ने यह आरोप लगाया है,कि एसईसीएल प्रबंधन के जीएम के द्वारा पूर्व में यह आश्वासन दिया था कि बिलासपुर में बैठक कर इन मांगों पर निर्णय लिया जाएगा। लेकिन आज तक कोई ठोस जवाब ग्रामीणों को नहीं मिला है। एक निजी कंपनी के प्रवेश पर विरोध की चेतावनी दिया गया है। ग्रामीणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि वह कंपनी ग्राम में प्रवेश कर सर्वे करती है, या ग्रामीणों पर दबाव बनाने की कोशिश करती है, तो उसका जोरदार विरोध ग्रामीणों द्वारा किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी एसईसीएल और जिला प्रशासन का होगा। बैठक के दौरान जब एसईसीएल के अधिकारियों ने कहा कि 2004 और 2010 के बाद की भूमि मान्य नहीं होगी,तो ग्रामीण आक्रोशित हो कर बैठक से बाहर चले गए। हालांकि कुछ लोगों ने अपनी बात रखने की कोशिश किया,लेकिन पिछले मांगो के लेकर तनाव के वजह से बैठक पूरी तरह से संपन्न नहीं हो पाया।
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