भेंड़ा पाली में मूल निवासी समाज के लोगों ने हर्षोल्लास के साथ किया इशर गौरा पूजा

◼️इशर गौरा पूजा मूलनिवासी समाज का महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन : गंगू सिदार सेवानिवृत्त शिक्षक
सक्ती (सुघर गांव) 01 दिसंबर 2024 सक्ती विकासखंड अंतर्गत सुदूर पहाड़ी अंचल के गांव भेंड़ा पाली में इशर गौरा पूजा कार्यक्रम का भक्तिमय आयोजन 29 नवंबर से 01 दिसंबर तक सम्पन्न हुआ। इस भक्तिमय आयोजन में मूलनिवासी समाज के लोगों संग ग्राम के सभी वर्ग के लोग भी शामिल हुए। इस संबंध में ग्राम के वरिष्ठ नागरिक सेवानिवृत्त शिक्षक गंगू सिंह सिदार ने बताया कि उनके गांव में बहुत लंबे समय से इशर गौरा पूजा का कार्यक्रम आयोजित होते आ रहा है। शिक्षक गंगू सिदार ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा मे ईशर गौरा पूजा उत्सव को मूलनिवासी आदिवासी समाज बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाता है। ऐसी मान्यता है कि इशर गौरा विवाह से ही विवाह का संबंध जो आज मानव सभ्यता में प्रचलन में है चालू हुआ है। इस भक्तिमय आयोजन में कार्यक्रम के पहले दिन फुल कुटाई किया जाता है वहीं दूसरे दिन माटी लाने के साथ निर्माण कार्य व वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न होता है तो वहीं तीसरे व अंतिम दिन सेवा अर्जी पश्चात विसर्जन के साथ इस भक्तिमय आयोजन का समापन होता है। गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज का इशर गौरा विवाह एक ऐसा त्यौहार है जिसे मूलनिवासी समाज हर्षोल्लास के साथ मनाते चले आ रहा है। इसमें शंभू शेख और गौरा माता का विवाह किया जाता है। बात करें सक्ती अं चल की तो यहां भी गांवों में आदिवासी समाज के लोग बढ़ चढ़कर इस उत्सव को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। ऐसे आयोजनों से जहां एक तरफ धार्मिक मान्यताएं मजबूत होती हैं तो वहीं दूसरी तरफ समाज में आपसी एकता,प्रेम व भाईचारे की भावना भी बलवती होती है। भेंड़ा पाली में इस आयोजन को सफल बनाने में सम्पूर्ण ग्राम वासियों का अहम् योगदान रहा।

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