वरिष्ठ राजमहंत दशेराम खांडे बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजमहंत पी.एल.कोसरिया को मिली राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी।
सामाजिक सुधार,संगठन विस्तार और राष्ट्रीय मुख्यालय स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित।
सक्ती (सुघर गांव)। 22 जून 2026, जिला सक्ती के बाराद्वार में जगतगुरु गुरु गद्दी नशीन गुरु रूद्रकुमार के मुख्य आतिथ्य में अखिल भारतीय सतनामी महासभा का राष्ट्रीय सम्मेलन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में महासभा के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार एवं पंजीयन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया तथा नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। सम्मेलन में वरिष्ठ राजमहंत दशेराम खांडे को राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राजमहंत पी.एल. कोसरिया को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया। महासभा के संरक्षक मंडल में जगतगुरु विजय कुमार एवं जगतगुरु रूद्रकुमार को शामिल किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की पूजा-अर्चना, आरती एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। मुख्य अतिथि जगतगुरु रूद्रकुमार का पंथी मंगल भजन एवं सतनाम के जयघोष के साथ भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रीय महासचिव राजमहंत पी.एल.कोसरिया ने महासभा की प्रस्तावना एवं बायलॉज का वाचन किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष दशेराम खांडे ने महासभा के शताब्दी वर्ष पर संगठन को पुनः सक्रिय एवं पंजीकृत कर पूरे भारतवर्ष में समाज के सर्वांगीण विकास हेतु कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। राजमहंत जे.पी. कोशले ने आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए विभिन्न राज्यों के सामाजिक प्रतिनिधियों को संगठन से जोड़ने का आह्वान किया। वहीं डॉ.कुंती जांगड़े ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा नशापान एवं धर्मांतरण जैसी सामाजिक चुनौतियों के विरुद्ध संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। अपने आशीर्वचन में जगतगुरु रूद्रकुमार ने महासभा के गठन का स्वागत करते हुए प्रत्येक ग्राम में भंडारी, छड़ीदार एवं अठगवा समिति के गठन तथा जिलों में योग्य जिला महंतों की नियुक्ति के लिए नाम प्रस्तावित करने का निर्देश दिया। उन्होंने राजमहंत लालचंद मोहले को डीएसपी पद से सेवानिवृत्ति पर शुभकामनाएं दीं तथा छबिलाल रात्रे एवं मनीष बंजारे को राजमहंत घोषित किया। सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि महासभा का राष्ट्रीय मुख्यालय गिरौदपुरी धाम स्थित महंत निवास में स्थापित किया जाएगा।
सम्मेलन में पारित प्रमुख सामाजिक निर्णय
खर्चीली मृत्यु भोज प्रथा पर रोक। कफन - दफन में खून के रिश्तेदारों को छोड़कर अन्य लोगों द्वारा कपड़ा लाने की प्रथा पर रोक। संत गुरु घासीदास जयंती को शालीनता एवं सत्संग के साथ मनाने का निर्णय।
फूहड़ नाच - गम्मत एवं अमर्यादित गीतों के प्रचार-प्रसार पर रोक। सगाई, जन्म संस्कार एवं विवाह समारोह सादगीपूर्ण एवं सात्विक ढंग से सम्पन्न करने का आह्वान। जूता चुराई, गाँठ छुड़ाई एवं संग छुड़ाई के नाम पर धन मांगने की प्रथा पर रोक।सभी सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ गुरु घासीदास जी की पूजा-अर्चना एवं आरती से करने का निर्णय।
किसी भी धर्म अथवा मजहब के विरुद्ध अमर्यादित टिप्पणी नहीं करने का संकल्प।
नए जिला महंत एवं तहसील महंतों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव पारित प्रमुख पदाधिकारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ राजमहंत दशेराम खांडे,वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजमहंत राजेश्वर भार्गव, राजमहंत सुंदरसाय बंजारे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजमहंत सी.आर. टंडन, राष्ट्रीय महासचिव राजमहंत पी.एल.कोसरिया, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजमहंत लालचन्द्र मोहले,राजमहंत छबिलाल रात्रे,राष्ट्रीय सचिव राजमहंत बंशीलाल कुर्रे,राजमहंत जे.पी.कोशले,राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ.कुंती जांगड़े,राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राजमहंत पी.के.घृतलहरे को नियुक्त किया गया।
सम्मेलन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
जगतगुरु विजय कुमार,जगतगुरु रूद्रकुमार,वरिष्ठ राजमहंत दशेराम खांडे,राजमहंत राजेश्वर भार्गव, राजमहंत सुंदरसाय बंजारे,राजमहंत सी.आर. टंडन, राजमहंत पी.एल. कोसरिया,राजमहंत लालचन्द्र मोहले, राजमहंत छबिलाल रात्रे,राजमहंत बंशीलाल कुर्रे, राजमहंत जे.पी. कोशले, डॉ.कुंती जांगड़े, राजमहंत पी.के.घृतलहरे, हर्ष पाटले,घनश्याम आगरे, मदन जांगड़े, ज्योति लाल बंजारे,सुरेश भारती,श्रीकिशन बंजारे सहित छत्तीसगढ़ एवं विभिन्न राज्यों से आए राजमहंत,जिला महंत, तहसील महंत, भंडारी, छड़ीदार,अठगवा समितियों के प्रतिनिधि,महिला प्रतिनिधि एवं सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार हृदय अनंत ने सतनाम भजनों की प्रस्तुति दी। अंत में वरिष्ठ राजमहंत सुंदरसाय बंजारे ने सभी अतिथियों, प्रतिनिधियों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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