भंडारखोल पंचायत में RTI कानून की धज्जियां उड़ी सूचना अधिकारी ने बिना कारण बताए वापस लौटाया पत्र, भ्रष्टाचार की आशंका।


प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ

कोरबा ( सुघर गांव )। जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भंडारखोल में सूचना के अधिकार (RTI) कानून के प्रति घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ के जन सूचना अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने एक RTI आवेदन को बिना खोले और बिना किसी ठोस कारण के वापस लौटा दिया। इस घटना के बाद से पंचायत में भारी वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है। 

क्या है पूरा मामला :-

RTI कार्यकर्ता दीपक महंत ने ग्राम पंचायत भंडारखोल के विकास कार्यों और विभिन्न मदों में हुए खर्चों की जानकारी मांगी थी। इसके लिए उन्होंने भारतीय डाक के माध्यम से विधिवत आवेदन भेजा था। लेकिन, सूचना अधिकारी ने पत्र को पढ़ने या उसका जवाब देने के बजाय उसे बिना खोले ही वापस कर दिया।

भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश :-

कार्यकर्ता दीपक महंत का कहना है कि सचिव और सरपंच की मिलीभगत से ग्राम विकास के नाम पर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। अलग-अलग वित्तीय वर्षों में भारी रकम आहरित की गई है, लेकिन धरातल पर विकास की गति नगण्य है। सूचना देने में टालमटोल और पत्र को स्वीकार न करना यह दर्शाता है कि पंचायत प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने का प्रयास कर रहा है। मौलिक अधिकारों का हनन आरटीआई कानून के तहत जानकारी देना लोक सूचना अधिकारी का कानूनी दायित्व है। बिना कारण बताए आवेदन वापस करना न केवल पारदर्शिता के खिलाफ है, बल्कि यह नागरिकों के मौलिक और मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। जिले में आरटीआई के साथ इस तरह के खिलवाड़ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे शासन-प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।

प्रथम अपील दायर :-

सहायक लोक सूचना अधिकारी की इस मनमानी के खिलाफ कार्यकर्ता ने अब मोर्चा खोल दिया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत पाली के समक्ष प्रथम अपील दायर कर दी गई है। अब देखना यह होगा कि प्रथम अपील अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

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