“शिक्षा का मंदिर या मुनाफे का बाजार? बिलासपुर यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप” NSUI जिला अध्यक्ष मनमोहन राठौर का हमला—“छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”


विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ

कोरबा (सुघर गांव) उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। NSUI जिला अध्यक्ष मनमोहन राठौर ने अटल बिहारी भाजपाई विश्वविद्यालय, बिलासपुर पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय अब शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि “कमाई का जरिया” बन गया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा मूल्यांकन में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। राठौर ने दावा किया कि जानबूझकर छात्रों को कम अंक देकर बैक (फेल) लगाया जा रहा है, ताकि वे पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना के नाम पर मोटी फीस जमा करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हरदीबाजार कॉलेज में रसायन शास्त्र विषय में 142 में से 137 छात्रों को बैक दिया गया, जो गंभीर संदेह पैदा करता है। मुख्य बिंदु
परीक्षा परिणाम पर सवाल मेरिट में आने वाले छात्रों को भी बेहद कम अंक मिलने के आरोप, मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल।
आर्थिक शोषण का आरोप पुनर्मूल्यांकन और रीचेकिंग के नाम पर छात्रों से हजारों रुपए वसूले जा रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर अविश्वास राठौर का आरोप—“उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में पारदर्शिता नहीं, ठेकेदारी सिस्टम से हो रहा काम।”
NSUI की चेतावनी संगठन ने साफ किया कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ जारी रहा तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
राठौर ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 2025 में MA समाजशास्त्र की परीक्षा दी थी, जिसमें उत्तर पुस्तिका में असंगत उत्तर लिखने के बावजूद अच्छे अंक मिले। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो NSUI सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी। यह मुद्दा अब केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल बनता जा रहा है।

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