युवा सोच,सामाजिक विसंगतियां अउ जीवन के गहिरा दर्शन ला उजागर करत संवेदनशील रचनाएं
विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 09 अप्रैल 2026, जिला के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रेकी के युवा कवि रामशरण श्रीवास अपन सादगी भरे शब्दों म समाज के गहिरा सच ला उजागर करत हें। ओखर कविता सिरिफ भावनात्मक अभिव्यक्ति नई, बल्कि आज के सामाजिक व्यवस्था, युवा पीढ़ी के सोच अउ जीवन के संघर्ष के आईना घलो आय।
कविता
जइसे भी हो आना चाही।
हर पँछी ला दाना चाही।
ये सरकारी हुकुम हे खच्चित,
फांदा मा फँद जाना चाही।
लोकतंत्र के खुले खजाना,
देश भले लूट जाना चाही।
ये धरती मा जनम धरे हन्,
भाग अपन सगराना चाही।
बस स्कूल म नाँव लिखादिन,
पास सबो हो जाना चाही।
रेचका मेचका हगरु पदरू,
पढ़ लिख गे पद पाना चाही।
अस्पताल बर लइन लगावव,
हमला तो मयखाना चाही।
रिस्तेदारी बहुत निभा देन,
सब ल अपन घर जाना चाही।
हमर मया के कोन पुछारी,
सँगी ला सब भाना चाही।
टूट जथे सब दिन के सपना,
नींद घलो तो आना चाही।
मया करे अउ आँशु पाय,
अउ का तोला खजाना चाही।
फेर सँगी के सुरता आ गे,
चल प्रसाद अब गाना चाही।
छोड़ सबो ला जाना पड़थे
जमे जमाय बिराना पड़थे।
रीता कर रितियाना पड़थे।
जोड़े कतको गोटी माटी,
छोड़ सबो ला जाना पड़थे।
खोंदरा नवां बनाना पड़थे,
खोज के दाना खाना पड़थे।
ये जिनगी ले जतका लेबे,
करजा जमो चुकाना पड़थे।
वोखर बुलाय आना पड़थे,
अपन करम सोरियाना पड़थे।
का बोये हँव काटे परही,
सुरता कर पछताना पड़थे।
निभय नहीं त निभामा पड़थे,
अचरा मा गठियाना पड़थे।
मया ह माँगे मिलय नहीं जी,
जोहत जिनगी बिताना पड़थे।
समाज अउ युवा वर्ग बर संदेश
रामशरण श्रीवास अपन कविता के माध्यम ले साफ संदेश देथें — जिंदगी म कुछो पाना हे त मेहनत, ईमानदारी अउ जिम्मेदारी जरूरी हवय। मया (प्यार) अउ संबंध के महत्व समझव, काबर येच असली पूंजी आय। सिस्टम के कमजोरी ऊपर सवाल उठावव, फेर खुद के कर्तव्य ला घलो निभावव।
निष्कर्ष
गांव के माटी ले निकरे ये युवा कवि के शब्द सिरिफ कविता नई, बल्कि समाज बर चेतावनी अउ मार्गदर्शन आय। रामशरण श्रीवास के रचना नई पीढ़ी ला सोच बदले अउ सही दिशा म आगे बढ़े के प्रेरणा देथे।
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