विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ
कोरबा (सुघर गांव) जिले के पाली हाईस्कूल में सामने आई मारपीट की घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राचार्य पर अपने ही भौतिकी व्याख्याता के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिंसक व्यवहार के आरोप के बाद मामला तूल पकड़ चुका है। घटना के बाद न केवल शिक्षक समुदाय में आक्रोश है, बल्कि परिजनों के धरने ने इसे सामाजिक मुद्दा भी बना दिया है। बताया जा रहा है कि यह विवाद किसी एक दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही प्रशासनिक तनातनी का परिणाम है। 27 अप्रैल को यह तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब स्टॉक रजिस्टर में कथित गड़बड़ी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए l मामले के प्रमुख बिंदु विस्तार मैं
पुराना विवाद बना टकराव की जड़ स्कूल के अंदर प्राचार्य और व्याख्याता के बीच पिछले कई महीनों से कार्यप्रणाली और विभागीय मुद्दों को लेकर मतभेद चल रहे थे। यह असहमति धीरे-धीरे व्यक्तिगत तनाव में बदलती गई, जिसने अंततः विवाद को उग्र रूप दे दिया।
स्टॉक रजिस्टर और संसाधनों पर उठे सवाल सूत्रों के अनुसार फिजिक्स लैब के स्टॉक रजिस्टर में कई वर्षों की एंट्री अधूरी बताई जा रही है। साथ ही, स्कूल को उपलब्ध कराए गए कुछ उपकरणों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर दबाव और असहमति की स्थिति बनी।
घटना के दिन विवाद ने लिया गंभीर मोड़ 27 अप्रैल को प्राचार्य कक्ष में हुई बहस अचानक बढ़ गई। आरोप है कि स्थिति इतनी बिगड़ी कि शिक्षक को चोटें आईं और उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज जरूरी था।
परिजनों का विरोध और धरना घटना के बाद पीड़ित शिक्षक की 65 वर्षीय मां ने स्कूल के मुख्य गेट पर बैठकर विरोध जताया। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं होती, वे धरना जारी रखेंगी। यह विरोध अब सामाजिक समर्थन भी जुटा रहा है।
पुलिस और प्रशासनिक जांच शुरू पीड़ित पक्ष द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी जवाब-तलब की प्रक्रिया जारी है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल इस पूरे घटनाक्रम ने स्कूल जैसे संवेदनशील संस्थान के वातावरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता है कि ऐसे माहौल का छात्रों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष पाली हाईस्कूल का यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता, अनुशासन और जिम्मेदारी पर व्यापक बहस का विषय बन गया है। अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है—देखना होगा कि जांच के बाद क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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