अकती पर पी.पी. अंचल की काव्य गूंज सौहार्द, संस्कृति और संवेदनाओं का सशक्त संदेश उतरदा के हिन्दी व्याख्याता ने कविता के जरिए समाज में एकता, प्रेम और मधुर व्यवहार का आह्वान किया


विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ 

कोरबा (सुघर गांव) जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उतरदा के हिन्दी व्याख्याता श्री पी.पी. अंचल ने अकती (अक्षय तृतीया) के पावन अवसर पर अपनी दो प्रभावशाली कविताओं के माध्यम से समाज को गहन संदेश दिया। उनकी रचनाओं में लोकजीवन की मिठास, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

अकती आज तिहार के, बहुत मुबारकबाद।
जीवन में खुशियाँ मिले, रहिए जिंदाबाद।।
करसी के पानी घलो, आजे ले सुरुआत।
ठंडा पानी पी सको, मिलथे जी सौगात।।

रंग गुलाबी गाल के, मिटे कभू झन छाप।
रहे सलामत एकता, होवय बन्द प्रलाप।।
मुँख से मधुरस ही बहे, रोज नेह के धार।
बने रहय सदभावना, सबके अंतस प्यार।।

मुख्य बिंदु - 
👉 लोक परंपरा और उत्सव की जीवंत झलक
👉 समाज में एकता, प्रेम और सौहार्द का संदेश
👉 मधुर वाणी और सकारात्मक सोच का आह्वान
👉 सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की प्रेरणा
सारांश व संदेश इन कविताओं के माध्यम से श्री अंचल ने स्पष्ट किया कि जीवन की वास्तविक सुंदरता आपसी प्रेम, मधुर व्यवहार और एकता में निहित है। उनकी पंक्तियाँ समाज को कटुता छोड़कर सद्भाव अपनाने, रिश्तों में मिठास घोलने और परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देती हैं।
अकती के इस शुभ अवसर पर उनका यह संदेश विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक और समाज के लिए एक सकारात्मक दिशा देने वाला प्रेरक विचार बनकर उभरता है।

Post a Comment

0 Comments