कुसमुंडा परियोजना में कोयला स्टॉक पर बड़ा सवाल, करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप

कुसमुंडा परियोजना में कोयला स्टॉक पर बड़ा सवाल, करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप
 रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर,केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग
      विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो 
कोरबा (सुघर गांव)। 12 मार्च 2026, देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले कोरबा जिले की कुसमुंडा कोल परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की इस महत्वपूर्ण खदान में कोयले के स्टॉक को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि लाखों टन कोयले के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है,जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।  
               प्रमुख बिंदु
 स्टॉक रिकॉर्ड पर उठे सवाल दस्तावेजों के अनुसार मार्च 2025 के अंत में स्टॉक में लगभग 96.90 लाख टन कोयला दर्ज किया गया था, जबकि अप्रैल 2025 की शुरुआत में इसे घटाकर करीब 89.99 लाख टन दिखाया गया। वहीं स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि वास्तविक रूप से स्टॉक इससे काफी कम है।
         हजारों करोड़ के कोयले पर संदेह 
आरोप है कि रिकॉर्ड और वास्तविक मात्रा में भारी अंतर के चलते करीब 70 लाख टन कोयले के हिसाब-किताब पर संदेह उत्पन्न हो गया है,जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2100 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
        अधिकारियों की भूमिका पर उठे प्रश्न 
शिकायत में कुसमुंडा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों — जीएम, कोलियरी मैनेजर, एरिया सर्वे अधिकारी और वित्त विभाग से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
       केंद्रीय एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग
मामले को गंभीर मानते हुए CBI, ED और केंद्रीय सतर्कता आयोग को लिखित शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच कराने की अपील की गई है।
      *डिजिटल सर्वे और ऑडिट की मांग* 
साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए स्टॉकयार्ड का ड्रोन और Lidar तकनीक से सर्वे कराने, साथ ही ERP/SAP सिस्टम और वेटब्रिज रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग उठाई गई है।
           गुणवत्ता में हेरफेर की आशंका
कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी आशंका जताई है कि कहीं निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री या पत्थर-मिट्टी को कोयले के रूप में दर्ज कर स्टॉक संतुलन तो नहीं दिखाया गया। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या संबंधित विभाग और कोयला मंत्रालय इस मामले की गहन जांच कराएंगे या यह मामला सिर्फ शिकायतों तक ही सीमित रह जाएगा। फिलहाल यह प्रकरण कोयला प्रबंधन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।

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