प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ
कोरबा ( सुघर गांव )। दीपका नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने की खुली बंदरबांट का मामला गरमा गया है। वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद कमलेश जायसवाल ने स्ट्रीट लाइट स्थापना के 84 लाख रुपये के टेंडर में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से लिखित शिकायत की है,घटिया निर्माण और सुरक्षा से खिलवाड़ के गंभीर आरोप पार्षद ने अपनी शिकायत में अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से हो रहे भ्रष्टाचार के निम्नलिखित प्रमाण दिए हैं। खंभों की मजबूती के लिए जरूरी कंक्रीट (PCC) का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, जिससे भविष्य में खंभे गिरने और बड़े हादसों का खतरा बना हुआ है। सामग्री की गुणवत्ता में हेरफेर मानक के विपरीत हल्के वजन वाले और बिना कोटिंग वाले घटिया पोल लगाए जा रहे हैं,टेंडर में प्रस्तावित 100 वॉट की ब्रांडेड लाइटों की जगह केवल 50-70 वॉट की सस्ती और नॉन-ब्रांडेड लाइटें लगाकर जनता के पैसे की लूट की जा रही है। बिजली केबल को निर्धारित गहराई (40-90 सेमी) के बजाय केवल 10 सेमी ऊपर ही दबा दिया गया है। साथ ही, करंट से बचाव के लिए जरूरी 'अर्थिंग' और MCCB जैसे सुरक्षा उपकरण भी गायब हैं।
पार्षद कमलेश जायसवाल का दावा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में निविदा राशि का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का खुला उल्लंघन बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और काम की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है,अब देखना यह होगा कि मुख्य सचिव कार्यालय इस गंभीर शिकायत पर क्या कड़ा रुख अपनाता है और क्या दोषियों पर गाज गिरेगी। नगर पालिका इंजीनियर के रवैये से पार्षद नाराज, लोक आयोग में शिकायत कर जाँच की मांग छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और जनप्रतिनिधियों के प्रति अधिकारियों की उदासीनता का एक नया मामला सामने आया है। नगर पालिका के विकास कार्यों में गुणवत्ता और मात्रा को लेकर उठे सवालों के बीच, पार्षद कमलेश जायसवाल ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम 2002 की धारा 9 के तहत प्रारंभिक और पूर्ण जाँच की मांग की है,इंजीनियर ने जानकारी देने से किया इनकार पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पार्षद ने कार्य की गुणवत्ता और मात्रा के संबंध में नगर पालिका इंजीनियर सिरिल भास्कर पापुला से लिखित जानकारी मांगी। आरोप है कि इंजीनियर ने किसी भी तरह की जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। यह रवैया इस सवाल को जन्म देता है कि आखिर विकास कार्यों के विवरण को जनप्रतिनिधियों से क्यों छुपाया जा रहा है? होगी धन की वसूली और ठेका रद्दीकरण की मांग पार्षद ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, ठेका रद्द नहीं किया गया और सरकारी धन की वसूली नहीं की गई, तो वे इस लड़ाई को उच्च स्तर तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि अधिकारी जनता और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह हैं, और पारदर्शिता का अभाव भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
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