02 साल पहले की भ्रष्टाचारी और दिखावा मरम्मत की फोटो ग्राफ्स के साथ प्रमाण पत्र की जुगाड़ में जूटे जिम्मेदार
युवा पत्रकार देशबन्धु नेताम
देवभोग गरियाबंद (सुघर गांव)। 22 मार्च 2026,
बीते 2024 में प्राथमिक मिडिल और हाई स्कूलों के फर्श किचन शौचालय दरवाज़ा खिड़की जैसे आवश्यकता अनुसार मरम्मत कार्य के लिए जिले भर के करीब करीब 115 स्कूलों में 40 हज़ार से लेकर 01 लाख 20 हज़ार रूपये तक की स्वीकृत किया गया मोटा माटी माने तो 60 लाख रूपये से कई ज़्यादा राशि राज्य सरकार द्वारा मरम्मत के लिए जारी किया था। जिसके बावजूद इसके अधिकांश शौचालय की मरम्मत फ़ाईलो तक ही सिमट कर रह गई मतलब मरम्मत की राशि सर्व शिक्षा अभियान विभाग के जिम्मेदार और कार्य एजेंसी के बीच अधिकांश राशि का बंदरबांट हो गया और दिखावे के लिए शौचालय के दीवारों में रंग रोगन कर खानापूर्ति मरम्मत को अंजाम दे दिया। जबकि कई स्कूलों में सिर्फ कागज पर मरम्मत करने की बात सामने आई है और अब जब जिला पंचायत सीईओ द्वारा फोटो ग्राफ़्स के साथ प्रमाण पत्र मांगा है तब कार्य एजेंसी के अलावा अधिकारियों द्वारा इस भ्रष्टाचार कार्य से बचने का जुगाड़ लगाया जा रहा है। ख़ास कर मैनपुर देवभोग गरियाबंद में यह देखने सुनने को मिल रहा है बाकायदा इसकी कई बार शिकायत के अलावा मीडिया सुर्खियां भी बनी लेकिन तगड़ी सेटिंग के चलते न धरातल में मरम्मत हो पाया और न जिम्मेदारों के विरुद कार्यवाही।
ऐसे में इस बार भी जुगाड़ वाला फोटो ग्राफ़्स के साथ प्रमाण पत्र देकर मामला सलटाने की पूरी कोशिश में है। जानकारी अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग सवंर्ग के भवन फर्श मरम्मत छत मरम्मत शौचालय मरम्मत किचन शेड दरवाज़ा खिड़की जैसे प्रत्येक मरम्मत कार्य की स्वीकृति देते 02 प्रतिशत जीएसटी काट कर पूरी राशि निर्माण कार्य एजेंसी को जारी कर दिया। लेकिन इनमे से कई मरम्मत काम सिर्फ काग़ज़ पर दर्शया गया और जो मरम्मत कार्य हुए वह भी सिर्फ़ रंग रोगन दिखावे की तरह मरम्मत को अंजाम दिया गया। ऐसे में सरकार की लाखों रुपए जिम्मेदार अधिकारी और एजेसी के बीच बंदरबांट होकर सीमट गया तभी साल भर बीतने के बाद भी मरम्मत नहीं हुआ।
बाहर के रंग रोगन और दूसरे शौचालय के फोटो ग्राफ्स देने की संभावना
मरम्मत कार्य की अब जब जिला सीईओ द्वारा फोटोग्राफ्स के साथ प्रमाण पत्र जमा करने के आदेश दिए हैं। तब निर्माण एजेंसी और अधिकारियों के गले से पानी उतारना मुश्किल हो गया है। क्योंकि मरम्मत काम तो हुआ ही नहीं है ऐसे में किसका फोटोग्राफ्स के साथ प्रमाण पत्र दिया जा सकता है इसलिए बाहर से किए रंग रोंगन और दूसरे स्कूल के चकाचक शौचालय मरम्मत की फोटोग्राफ्स के साथ प्रमाण पत्र देने की पूरी संभावना बन रही हैं। बाकायदा इसके लिए राय शुमारी भी शुरू हो चुका हैं ताकि हर हाल मे भ्रष्टाचार कार्य को दबाने ने कामयाब हो जाए इसलिए धरातल की वस्तु स्तिथि को बारीकी से अवलोकन करने की दरकार बताई जाती है ताकि बिना मरम्मत किए और भ्रष्टाचार कार्य को अंजाम देने वालो की असलियत सामने आ सके।
जिला सीईओ के निगरानी में जांच की दरकार
जिस तरह स्कूलो में स्वीकृत मरम्मत कार्य को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाते अपने - अपने जेब भरने में जिम्मेदार कामयाब रहे और अब भ्रष्टाचार एवं बिना कराए कार्य को रफा दफा कराने में एड़ी चोटी का जोर लगाएं है उसे देख जिला सीईओ की निगरानी में मामले की परत दर परत जांच कराने की आवश्यकता है ताकि इस बार स्कूलों में स्वीकृत हुए मरम्मत कार्य निर्धारित लागत से नियमानुसार कराया जा सके। क्योंकि सत्र 2025 - 26 के मरम्मत कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ना आम बात होगी हालांकि पूरी भ्रष्टाचार के खेल की शिकायत जिला सीईओ से शिक्षा मंत्री से तक करने स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संकेत दे दिया है। क्योंकि बीते कई वर्षों से मरम्मत की राशि अधिकारी और निर्माण कार्य एजेंसी के बीच सिमट जाता है और शिकायत वह अधिकारी कार्यवाही से बच निकलते है लेकिन इस बार जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर से कार्यवाही की पूरी उम्मीद बनी हुई है।
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