पचपेड़ी में गौरा-गौरी पूजा,आस्था और संस्कृति का उत्सव,मादर की थाप पर झूमे जिला पंचायत सदस्य रज्जाक अली

पचपेड़ी में गौरा-गौरी पूजा,आस्था और संस्कृति का उत्सव,मादर की थाप पर झूमे जिला पंचायत सदस्य रज्जाक अली
         विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
   कोरबा (सुघर गांव)। 01 फरवरी 2026,
जिले के ग्राम पंचायत पचपेड़ी में पारंपरिक आस्था से जुड़ा गौरा - गौरी पूजा महोत्सव श्रद्धा,उत्साह और लोक संस्कृति के रंगों के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। पूरे आयोजन के दौरान गांव का माहौल भक्ति और उल्लास से भरा रहा।
         लोक संस्कृति में रमे रज्जाक अली
 पूजा कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सदस्य रज्जाक अली भक्ति भाव में डूबकर मादर बजाते हुए लोकगीतों पर नाचते नजर आए। उनका यह दृश्य ग्रामीणों के बीच सामाजिक समरसता और आत्मीयता का प्रतीक बना।
           अनेकता में एकता का संदेश 
आदिवासी लोक संस्कृति और पारंपरिक गीत-नृत्य में सहभागिता कर रज्जाक अली ने अनेकता में एकता और वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को व्यवहार में उतारकर दिखाया।
          विधिवत पूजा-पाठ और सहयोग
 अतिथियों द्वारा विधिवत पूजा - अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए 5100 रुपये की सहयोग राशि प्रसाद वितरण हेतु प्रदान की गई।
      रज्जाक अली का उद्बोधन व आभार
 रज्जाक अली ने अपने उद्बोधन में कहा कि ग्रामवासियों ने उन्हें प्रचंड मतों से विजयी बनाकर सेवा का अवसर दिया,जिसके लिए वे सदैव कृतज्ञ रहेंगे। उन्होंने माता - बहनों,बच्चों,युवाओं,बुजुर्गों सहित सभी ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
     अन्य उपस्थित अतिथियों का संयुक्त वक्तव्य
 कार्यक्रम में उपस्थित अमर खांडे (विधायक प्रतिनिधि, रामपुर) एवं द्वारिका कौशिक (पूर्व सभापति करतला) ने अपने संबोधन में कहा कि गौरा-गौरी पूजा छत्तीसगढ़ की लोक और आदिवासी संस्कृति की पहचान है,जो समाज में भाईचारा,आपसी सम्मान और एकता को मजबूत करती है। उन्होंने ग्रामवासियों से परंपराओं को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
           नेतृत्व की सराहना
वक्ताओं ने रज्जाक अली जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में गांव में सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा मिल रही है।
        लोक परंपरा से जुड़ता समाज 
ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से लोक संस्कृति जीवंत रहती है और समाज के सभी वर्ग एक मंच पर एकजुट होते हैं।

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