छेरछेरा तिहार के पावन अवसर म मुड़ापार सरपंच श्रीमती सिल्की बाई के तरफ से आप सब्बो प्रदेशवासी अउ ग्रामवासी मन ला गाड़ा-गाड़ा बधाई अउ शुभकामना ।


प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ 

कोरबा ( सुघर गांव ) जिले के पाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़ापार के सरपंच श्रीमती सिल्की बाई के तरफ से आप सब्बो प्रदेशवासी अउ ग्रामवासी मन ला गाड़ा-गाड़ा बधाई,छेरछेरा तिहार (पारंपरिक महत्व) दान के परब :- छत्तीसगढ़ के यह पारंपरिक तिहार "छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरते हेरा" के जयघोष के संग मनाए जाथे। ए तिहार दान ले अउ दान दे ले जुड़े हावे, जेमा ऊंच-नीच के भेदभाव ला भुला के सब्बो झन एक-दूसरे ला अन्न दान करथें। नई फसल के खुशी :- जब किसान मन के कोठी धान ले भर जाथे, तब ओ मन अपन मेहनत के फसल के खुशी मनाए बर यह तिहार ला पौष पूर्णिमा के दिन मनाथें, सामाजिक समरसता: ए तिहार हमर छत्तीसगढ़िया संस्कृति के उदारता अउ "अन्नपूर्णा" देवी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करे के माध्यम आय। सरपंच सिल्की बाई के संदेश हे कि ए छेरछेरा आप मन के जीवन में सुख, शांति अउ समृद्धि लेके आए। छेरछेरा तिहार काबर मनाय जाथे?छेरछेरा तिहार मुख्य रूप ले दान अउ परोपकार के परब आय। जब किसान मन के खेत मा धान के मिसाई (मिंजई) हो जाथे अउ कोठार मा धान के रास लग जाथे, तब ओ मन अपन खुशी ला बांटे बर अउ अन्नपूर्णा दाई (माता अन्नपूर्णा) के प्रति आभार जताय बर ए तिहार ला मनाथें। ए दिन ऊंच-नीच के भेदभाव ला भुला के सबो झन एक-दोसर ले धान या अन्न के दान मांगथें। ए तिहार कब ले मनाय जाथे । ए तिहार पौष मास के पुन्नी (पूर्णिमा) के दिन मनाय जाथे। साल 2026 मा ए तिहार 3 जनवरी के दिन मनाय जावत हे। ए परब के शुरुआत के पीछे राजा कल्याण साय के पौराणिक कथा घलो जुड़ें हे, जेकर बाद ले एला बछर-बछर ले मनाय जावत हे।तिहार के खास बात :- लइका अउ सयान मन घर-घर जाके "छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरते हेरा" बोल के दान मांगथें।ए दिन माता अन्नपूर्णा अउ शाकम्भरी देवी के पूजा करे जाथे।दान मा मिले धान ला जनहित या सामाजिक काम मा खरच करे जाथे।

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