पत्रकारों के लिए समर्पित विश्राम गृह छत्तीसगढ़ बना मिसाल पत्रकारों को मिला अपना ठिकाना

पत्रकारों के लिए समर्पित विश्राम गृह छत्तीसगढ़ बना मिसाल पत्रकारों को मिला अपना ठिकाना
    रायपुर (सुघर गांव)। 29 दिसंबर 2025, 
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता की असली ताक़त उसकी स्वतंत्रता,निष्पक्षता और निर्भीकता में निहित है। परंतु इस निर्भीकता के पीछे संघर्ष,असुविधाएँ और निरंतर दौड़ - भाग की वह कहानी छिपी होती है,जिसे बहुत कम लोग देख पाते हैं। ऐसे समय में जब पत्रकारों की सुरक्षा और सुविधा पर अक्सर सवाल उठते हैं,छत्तीसगढ़ की धरती से उठी एक ऐतिहासिक पहल आशा की नई किरण बनकर सामने आई है। यह पहल किसी सरकारी आदेश या बजट घोषणा का परिणाम नहीं,बल्कि प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की समर्पित,स्वप्रेरित और गैर - सरकारी प्रयास का सशक्त उदाहरण है। देश में पहली बार किसी राज्य ने पत्रकारों के लिए समर्पित पत्रकार विश्राम गृह की व्यवस्था कर यह सिद्ध किया है कि जब संकल्प सच्चा हो,तो संसाधन अपने आप रास्ता बना लेते हैं। राजधानी रायपुर के सेजबहार स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में निर्मित यह पत्रकार विश्राम गृह न केवल ईंट पत्थर की संरचना है,बल्कि पत्रकार सम्मान की जीवंत अभिव्यक्ति भी है। कुछ वर्ष पूर्व देश एवं राजधानी के वरिष्ठ पत्रकारों की गरिमामय उपस्थिति में इसका शुभारंभ हुआ जो अपने आप में इस पहल की विश्वसनीयता और गरिमा को रेखांकित करता है।
लगभग 10 सुसज्जित कमरों,पुस्तकालय जैसी बौद्धिक सुविधा और सुव्यवस्थित वातावरण के साथ यह विश्राम गृह छत्तीसगढ़ ही नहीं,बल्कि अन्य राज्यों से आने वाले पत्रकारों के लिए भी निर्धारित नियमावली के अनुरूप पूर्णतः निःशुल्क आवास सुविधा उपलब्ध कराता है। यह व्यवस्था यह संदेश देती है कि पत्रकार सिर्फ़ समाचार लाने वाले नहीं,बल्कि समाज के सजग प्रहरी हैं जिनकी बुनियादी जरूरतों का सम्मान किया जाना चाहिए। आज जब पत्रकारिता व्यावसायिक दबावों, जोखिमों और असुरक्षाओं के दौर से गुजर रही है,तब यह पहल एक वैचारिक घोषणा है कलम के सिपाहियों के लिए,कलम के सिपाहियों द्वारा। यह विश्राम गृह न केवल थकान मिटाने का स्थान है, बल्कि संवाद,अध्ययन और आत्मबल को पुनर्जीवित करने का केंद्र भी है। यह प्रयास बताता है कि संस्थागत एकजुटता किस प्रकार ठोस परिवर्तन ला सकती है। यह उन सभी संगठनों और समाज के वर्गों के लिए प्रेरणा है, जो पत्रकारिता के भविष्य को सुरक्षित,सम्मान जनक और सशक्त देखना चाहते हैं। आवश्यक है कि इस जनहितकारी पहल को व्यापक समर्थन मिले साझा किया,सराहा और अनुकरणीय मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया जाए। क्योंकि जब पत्रकार सशक्त होंगे,तभी लोकतंत्र सशक्त होगा। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से पत्रकारों को समर्पित विश्राम गृह भवन निर्माण मिल का पत्थर साबित होते हुए पत्रकार गणों की मिसाल के रूप में देखा जा रहा हैं।

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